रबि उल अव्वल, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
जिस शख्स की रूह इस हाल में उसके जिस्म से जुदा हो के वो तीन हो के वो तीन चीजों से बरी हो तो वो जन्नत में जाएगा 1, तकब्बुर 2, कर्ज और 3 खयानत
वज़ारत हज का कहना है कि उमरा सीज़न के आग़ाज़ से अब तक 109 ममालिक के 12 लाख उमरा ज़ाइरीन ममलकत पहुंच चुके हैं। जारी रिपोर्ट में मज़ीद कहा गया है कि उमरा ज़ाइरीन की ममलकत आमद 15 ज़ील हज से शुरू हो गई थी।
वज़ारत की जानिब से बैरून ममलकत से आने वाले उमरा ज़ाइरीन के जो आदाद-ओ-शुमार दिए गए वो 45 दिन के हैं। उमरा सीज़न का आग़ाज़ 15 जील हज्ज से किया गया था। 30 मुहर्रम तक 12 लाख उमरा ज़ाइरीन की तादाद रिकार्ड की गई।
वज़ारत हज का मज़ीद कहना था कि गुजिश्ता बरस के मुक़ाबले में रवां साल इसी अर्से के दौरान आने वाले उमरा ज़ाइरीन की तादाद में 30 फ़ीसद इज़ाफ़ा रिकार्ड किया गया जबकि 27 फ़ीसद इज़ाफ़ी उमरा वीज़े जारी हुए।
रवां बरस वज़ारत हज की जानिब से 14 जील हज्ज से ही उमरा वीज़ों को खोले जाने का ऐलान किया गया था जिसके फ़ौरी बाद 15 जील हज्ज से अमली तौर पर नसक़ पोर्टल के ज़रीये उमरा वीज़े जारी किए जाने लगे।
वज़ारत हज ने उमरा ज़ाइरीन के लिए रहनुमा उसूल जारी किए
सऊदी वज़ारत-ए-हज-ओ-उमरा ने ज़ाइरीन-ए-हरमैन की आसानी के लिए रहनुमा उसूल जारी किए हैं ताकि वो आराम से उमरा अदा सकें।वज़ारत का कहना है कि 'ज़ाइरीन मस्जिद उल-हराम में आते वक़्त अपनी ज़रूरी अश्या रखने के लिए स्मार्ट बैग का इंतिख़ाब करें ताकि गै़रज़रूरी मशक़्क़त ना उठानी पड़े। वज़ारत की जानिब से उमरा ज़ाइरीन को कहा गया कि 'मस्जिद उल-हराम में उमरा की अदायगी के लिए आपका पुरसुकून होना इंतिहाई अहम है।
वजारत ने कहा कि अपने हमराह गै़रज़रूरी अश्या रखने से आपकी तवज्जा उनकी जानिब माइल हो सकती जो पुर सुकून इबादत में खलल डाल सकता है। वजारत का कहना है कि अपने साथ एक छोटा सा पर्स नुमा बैग रखें जिसमें शिनाख़ती दस्तावेज़, मोबाइल के साथ मास्क, सेनीटाईजिंग टिशू पैक मौजूद हो, इसमें ज़्यादा अश्या ना रखें।
वाजेह रहे कि मस्जिद उल-हराम के बैरूनी सेहनों में लाकर्ज मौजूद हैं जहां ज़ाइरीन मस्जिद उल-हराम में दाख़िल होने से क़बल अपना इज़ाफ़ी सामान बहिफ़ाज़त रखवा सकते हैं, ताहम बेहतर होगा कि वो अपना सामान कमरे में रखें ताकि यकसू हो कर इबादत कर सकें।