मकबूजा बैतुल-मुकद्दस : आईएनएस, इंडिया
मकबूजा बैतुल-मुकद्दस के शहरियों ने मस्जिद अकसा से मुत्तसिल (लगे हुए) कतानीन मार्केट को यहूदियों के माबद (मंदिर) में बदलने और उसे इबादत-गाह में तबदील करने के इसराईली काबिज के मन्सूबों से खबरदार किया है।

File Photo Baitu Mukaddas
बैतुल-मुकद्दस के एक सरकरदा शहरी और मुहक़्किक (शोधकर्ता) रिजवान अमरो ने एक प्रेस बयान में कहा कि काबिज हुक्काम और इंतिहापसंद यहूदी गिरो कतानीन मार्केट को एक छत वाली इबादत गाह में तबदील करने के लिए काम कर रहे हैं। अमरो ने वजाहत की कि आबादकारों ने कल इतवार को वहां मेजें और कुर्सियां, मजहबी किताबें और दीगर सामान पहुंचाया है ताकि वहां पर यहूदियों को इजतिमाई मजहबी रसूमात की अदाई के लिए जमा किया जा सके। दूसरी तरफ काबिज फौज ने यहूदी आबाद कारों को तहफ़्फुज फराहम करने के लिए फूल प्रूफू इंतिजामात किए हैं। फौज और पुलिस की सिक्योरिटी में 660 से जाइद आबाद कारों ने कल इतवार को मस्जिद अकसा पर धावा बोला। आबादकारों ने मस्जिद अकसा के मशरिकी इलाके में मजहबी रसूमात अदा कीं जबकि काबिज फौजियों ने बैतुल-मुकद्दस की पुरानी गलियों में मराबतीन पर हमला किया।
यहूदी आबाद कारों ने बाबुल सलसला के करीब फलस्तीनीयों पर हमले किए और नबी-ए-पाक सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की शान में गुस्ताखी की। काबिज फोर्सिज ने कतानीन मार्कीट में दुकानों के मालिकान को मुसलसल सातवें रोज भी दुकानें बंद करने पर मजबूर किया ताकि वहां यहूदी आबादकारों को तलमोदी तालीमात के मुताबिक मजहबी रसूम की अदाई का मौका फराहम किया जा सके। सैकड़ों यहूदी आबाद कारों ने सब्जियों का नजराना लेकर कतानीन मार्केट पर हमला किया और बंद बाजार और उस की दुकानों की गलियों के दरमयान तलमोदी रसूम और रक़्स किया। मस्जिद अकसा से मुल्हिका बाजार गुजिशता पीर से यहूदियों की तातीलात के आगाज के साथ ही बंद कर दिया गया था। सिविक अल कतानीन मकबूजा बैतुल-मुकद्दस के पुराने शहर की छतों वाली मार्केटों में से एक है और ये मस्जिद अकसा के करीब तरीन मुकाम होने की वजह से अहमीयत का हामिल है। ये बाजार हाल ही में नाम निहाद इंतिजामीया के अहलकारों की तरफ से बहुत सी पाबंदीयों का शिकार रहा है। बाजार की 52 दुकानों के मालिकान हिरासां किए जाने और उनके सामान को लूटे जाने से परेशान हैं। अल कतानीन मार्कीट सुलतान सैफउद्दीन ने 1336 में बनाया था। इस नौईयत (तरह) के दुनिया में तीन बाजार हैं। एक सिविक अल कतानीन है जो बैत उल-मुकद्दस में है, दूसरा शाम में सिविक अलहमीदेह और तीसरा काहिरा में है जिसे सिविक खान अलजीत का नाम दिया जाता है।