शिक्षक दिवस पर परिचर्चा
बाल कलाकारों ने दी शानदार स्वागत नृत्य की प्रस्तुति
नई तहरीक : रायपुर
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शिक्षाविद सेवा प्रभाग द्वारा शिक्षक दिवस पर शान्ति सरोवर में परिचर्चा का आयोजन किया गया। समारोह में स्वामी विवेकानन्द तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के कुलपति डॉ. एमके वर्मा, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी भिलाई) के डायरेक्टर रजत मूना, ट्रीपल आईटी के रजिस्ट्रार लेफ्टिनेन्ट कर्नल राजेश कुमार मिश्रा, क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी और ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी ने भाग लिया।
सबसे अच्छा शिक्षक ‘मां’
स्वामी विवेकानन्द तकनीकी विवि के कुलपति डॉ. वर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, नैतिक शिक्षा को शामिल किए बिना आज की शिक्षा अधूरी है। वर्तमान शिक्षा सिर्फ तकनीकी विशेषज्ञता हासिल करने तक ही सीमित है। ऐसे समय पर मूल्य आधारित शिक्षा की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा में समग्रता का अभाव है। भौतिकता के दौर में हम आध्यात्मिकता से दूर होते जा रहे हैं। जिसके फलस्वरूप अपने मूल स्वरूप यानि आत्मा और परमात्मा को भूल गए हैं।
उन्होंने दुनिया में सबसे अच्छा शिक्षक ‘माँ’ को निरुपित किया। उन्होंने कहा कि समाज की मूल इकाई परिवार है। जिसे हम माताओं द्वारा शिक्षित कर सकते हैं। माताओं में पुरूषों की अपेक्षा आध्यात्मिकता और धार्मिकता ज्यादा होती है। सीखने की भी एक उम्र होती है। इसलिए नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा बचपन से ही दी जानी चाहिए।
क्रोध और अहंकार से बचें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी भिलाई) के डायरेक्टर रजत मूना ने कहा कि जिस किसी से हमें जीवन में कुछ सीखने को मिलता है, वह सभी हमारे लिए शिक्षक हैं। मनुष्य को अपनी क्षमता और शक्ति पर किसी तरह का अहंकार नहीं होना चाहिए। क्रोध से भी कोई फायदा नहीं है इसलिए इससे बचना चाहिए। ये दोनों ही बुराइयां हमें नुकसान पहुचाती हैं। प्रकृति हमें सर्दी, गर्मी और बाढ़ के माध्यम से यह सबक सिखाती है कि उसके आगे मनुष्य तुच्छ है।
बचपन में मिले संस्कार जीवन बनाते हैँ
ट्रीपल आईटी के रजिस्ट्रार लेफ्टिनेन्ट कर्नल राजेश कुमार मिश्रा ने कहा कि शिक्षा में मूल्यों का बहुत ज्यादा महत्व है। हमें सेना में देशभक्ति के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा दी जाती है। बचपन से जो संस्कार हमें घर पर मिलते हैं, वो बड़े होने पर बहुत काम आते हैं। तकनीकी ज्ञान के साथ ही जीवन मूल्यों का ज्ञान भी जरूरी है। अगर हमारे अन्दर मानवता के कल्याण की भावना नहीं है, तो हमारी शिक्षा अधूरी है।
पढ़े-लिखों की भीड़ में गुम होते जा रहे अच्छे इंसान
क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली ने बहुत तरक्की की है। वर्तमान शिक्षा अच्छा डॉक्टर, इन्जीनियर तो बना रही है लेकिन आध्यात्मिक शिक्षा के अभाव में समाज में अच्छे इन्सानों की कमी हो गई है। उच्च शिक्षित होने के बावजूद लोगों का मनोबल बहुत कमजोर है। इसीलिए लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। ऐसे समय पर जीवन में भौतिकता और आध्यात्मिकता का सन्तुलन रखने की जरूरत है।
राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी ने कहा कि शिक्षक वह शिल्पकार है, जो अनेक चैतन्य मूर्तियों को गढ़ने का काम करता है। नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा से हमारी सोच सकारात्मक बनती है।
परिचर्चा का संचालन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने किया।

