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गहरे पानी से नमुदार हुई 120 साल पुरानी मस्जिद


मस्जिद को करीब से देखने के लिए कीचड़ में कूदे लोग

- मुहम्मद जाकिर हुसैन : दुर्ग

बिहार के नवादा जिले के रजौली प्रखंड में फुलवरिया बांध है। बांध के पास ही चंदौली गांव है जहां से एक रोज गहरे पानी से 120 साल पुरानी मस्जिद के नमुदार होने की खबर आई जो देखते ही देखते जंगल में लगी आग की तरह फैल गई। जिसने भी सुना, वह चंदौली गांव की ओर दौड़ पड़ा। नतीजतन थोड़ी ही देर में चंदौली गांव में आसपास के कई गांवों के लोगों का हुजूम उमड़ आया। सभी गहरे पानी से अचानक नजर आने वाली मस्जिद को देखना चाह रहे थे। दूर से पहले सिर्फ गुंबद नजर आ रहा था। बाद में पानी कम होने के साथ ही पूरी मस्जिद दिखाई देने लगी। मस्जिद को करीब से देखने के लिए लोग कीचड़ में कूद पड़े। मुकामी लोगों के मुताबिक मस्जिद 120 साल पुरानी है जो गुजिश्ता कई सालों से डैम के पानी में डूबी हुई थी। 

तीस सालों से गहरे पानी में थी मस्जिद

मस्जिद के बारे में मुकामी लोगों ने बताया कि चंदौली गांव के करीब नदी पर फुलवारी बांध बनने से पहले वहां मुसलमानों की बड़ी आबादी थी। बाद में जब वहां बांध बनाने की जरूरत महसूस हुई, सरकार ने आसपास की जमीन खाली करवा ली। वहां रह रहे लोग दूसरी जगहों पर शिफ्ट हो गए लेकिन मस्जिद वहीं रह गई। बांध बनने के बाद जब वहां पानी जमा होने लगा तो मस्जिद उसमें समा गई और अब तकरीबन तीस सालों बाद यह नजर आ रही है। 

मुकामी रहवासी मोहम्मद शमशेर के मुताबिक फुलवरिया बांध का 1984 में बनाया गया था। तब वहां मुस्लिमों की बड़ी आबादी थी। बांध बनाने के लिए सरकार ने आसपास की जमीन का अधिग्रहण किया तो यहां रह रहे लोगों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया। इनमें से ज्यादातर लोग हरदिया बांध के करीब एक गांवों में रहते हैं। मोहम्मद शमशेर ने कहा कि यहां के लोग तो दूसरी जगह शिफ्ट हो गए लेकिन मस्जिद यहीं रह गई थी जो बांध में पानी भरने के सबब उसमें समा गई थी। 

कीचड़ में कूदे लोग

बांध का पानी कम होने के साथ ही मस्जिद नजर आने लगी थी। पानी से गुंबद का ऊपरी हिस्सा दिखाई देने के साथ ही यह खबर आसपास के गांवों में फैल गई। इसके साथ ही लोगों का हुजूम चंदौली गांव में उमड़ आया था। लोग मस्जिद को करीब देखना चाह रहे थे लेकिन आसपास तब भी काफी भरा था। धीरे-धीरे पानी कम होता गया। इसके साथ ही मस्जिद का बाकी हिस्सा भी पानी से बाहर आता गया। देखते ही देखते मस्जिद की पूरी इमारत पानी से बाहर आ गई। सालों से पानी में डूबी रहने वाली मस्जिद को करीब से देखने लोग कीचड़ में ही कूद पड़े। हालांकि मस्जिद के करीब दलदली कीचड़ होने के सबब लोग मस्जिद तक नहीं पहुंच सके तो भी कुछ लोग मस्जिद के काफी करीब तक पहुंचने में कामयाब हो गए थे। उनका कहना है कि सालों से पानी में डूबी होने के बावजूद मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। 


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