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अंजुमन इस्लामिया के हाजी मुख़्तार सदर और डा. तारिक सेके्रटरी मुंतखिब


 - सैयद शहरोज कमर, रांची

अंजुमन इस्लामिया का आखिरकार इंतिखाब अमल में आया और बखूबी आया। एक सरमाये को लायक निगरां मयस्सर हुए।  जिसके मुताबिक सदर हाजी मोहम्मद मुख़्तार, नायब सदर मोहम्मद नौशाद, जनरल सेक्रेटरी डॉ. तारिक, जॉइंट सेक्रेटरी मोहम्मद शाहिद के अलावा बतौर आमला मेम्बर शाहिद अख़्तर टिकलू, शहजाद बब्लू, मोहम्मद नजीब, मोहम्मद नकीब, मोहम्मद लतीफ, अय्यूब राजा खान, नदीम अख़्तर, नूर आलम, साजिद उमर, वसीम अकरम, शाहीन अहमद (दैनिक हिंदुस्तान के सीनियर नुमाइंदा) और मोहम्मद खलील दाद-ए-तहसीन के मुस्तहक हैं। इन्हें दिल की गहराइयों से मुबारकबाद! जो चुनकर नहीं आ सके, उन्हें भी उनकी जद्दोजिहद और काविशों के लिए सताइश। उनकी समाजी खिदमात में कोई कमी न आए। उसी हौसले के पंख उनकी जीत को यकीनी कभी बनाएंगे।

जज्बे से सरशार हारे-जीते सभी के जोश को वसीम बरेलवी का शेर दुगुना कर देता है :

जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा

किसी चराग का अपना मकाँ नहीं होता।

जो जीतकर आए उनसे उम्मीदें वावस्ता हैं। वे उनसे भी मशविरा लें, जो अहल हों। अब वक़्त है कि खिदमत खल्क को आम किया जाए। दीन भी हुकूकुल इबाद को अव्वल तरजीह देता है। चूंकि मुफक्किर और मुल्क के पहले वजीर-ए-तालीम रहे मौलाना अबुल कलाम आजाद की देरीना सोच की जावेद-ताबीर है अंजुमन इस्लामिया। यह रांची और एजाफात के मुसलमानों का वाहिद इदारा है, जिसकी बात और अमल का असर दूर तक पहुंचता है। हुजूर अकदस सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम फरमा गए, मशवरे में खैर है। बरकत है। इसलिए शूरे की रिवायत रही है। और रांची की अंजुमन दरअसल हम सभी के लिए उसी अहमियत की हामिल है। आप सभी दानिशमंद हैं। नई टीम एक गुलदस्ता है। हर एक अपने फील्ड का उस्ताद है। कुछ नए हैं तो कुछ पुराने। कुछ जवाँ हैं तो कुछ उम्र-रसीदा। जेहन में हालात-ए-हाजरा और मौलाना अबुल कलाम आजाद के ख़्वाब को रखें। तहजीब की पासदारी, इल्म की शमा, इखलाक का हुस्न, तजुर्बा की तपिश और जुनून की रवानी के साथ कदम बढ़ाएं नया सूरज आपका इस्तकबाल करता है।

राहत इंदौरी का शेर नज्र है:

न हम-सफर न किसी हम-नशीं से निकलेगा

हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा।


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