नई दिल्ली : आईएनएस, इंडिया
राज्यसभा के साबिक रुक्न पार्लियामेंट अली अनवर और आॅल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के सदर ने अपोजीशन जमातों को खत लिख कर मुल्क के पसमांदा मुस्लमानों और दीगर पसमांदा बिरादरियों की फलाह-ओ-बहबूद और तरक़्की के लिए उनकी हिमायत की दरखास्त की है।
खत में अली अनवर ने कहा कि अपोजीशन पसमांदा मुस्लमानों के मुआमले पर वाजेह मौकिफ इखतियार करने में नाकाम रही है। उन्होंने लिखा कि पसमांदा सिर्फ वोट बैंक नहीं है, बल्कि ये समाजी इन्साफ और मुसावात की लड़ाई का हिस्सा है। उन्हें सियासत के मर्कजी धारे में लाना और समाजी और मआशी इन्साफ को यकीनी बनाना हमारा आईनी और जमहूरी हक है। उनका मजीद कहना था कि पसमांदा जमात का अलामती लफ़्ज जात नहीं है, इसलिए अपोजीशन को इस लफ़्ज से नहीं डरना चाहिए। अनवर ने कहा कि अपोजीशन जमातों को लफ़्ज पसमांदा से खौफजदा नहीं होना चाहिए, ये उर्दू फारसी जबान का लफ्ज है लेकिन इसका मजहब या जात से कोई ताल्लुक नहीं है। ये लफ़्ज हिन्दुस्तानी आईन में इस्तिमाल हुआ है।
कम्यूनिटी की हालत के बारे में बात करते हुए अनवर ने कहा कि पसमांदा गरीब, नजरअंदाज और दलितों की तरह पसमांदा हैं, कुछ हिस्सों में इससे भी बदतर हालात उन्होंने कहा कि मौजूदा मर्कजी हुकूमत ने कौमी सतह पर जात-पात की मर्दुम-शुमारी कराने से इनकार कर दिया है। जातपात की मर्दुम-शुमारी ना कराने की एक वजह मुस्लिम, ईसाई बिरादरियों में दलितों के लिए दर्ज फेहरिस्त जात के दर्जा का मसला है।
उन्होंने कहा कि मर्कज में इकतिदार में आने पर वो कौमी सतह पर तमाम दर्ज फेहरिस्त जातों की समाजी-ओ-इकतिसादी मर्दुम-शुमारी कराएंगे। इसमें कोटा बढ़ा कर दलित, मुस्लमान और ईसाई को भी शामिल करेंगे। अली अनवर ने कहा कि अगर पसमांदा मुस्लमानों को बाइखतियार बनाया गया तो मुस्लमानों में तंज करने वाले दकयानूसी तसव्वुरात कम होंगे और अगर पसमांदा को दूसरों के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला तो उनके हालात बेहतर होंगे। इससे कब्ल 15 जुलाई को भी अली अनवर ने वजीर-ए-आजम नरेंद्र मोदी को खत लिख कर यही दरखास्त की थी। हैदराबाद में हाल ही में बीजेपी की नेशनल वर्किंग कमेटी की मीटिंग में वजीर-ए-आजम नरेंद्र मोदी ने सब का साथ, सब का विकास के नारे का खाका पेश करते हुए कहा था कि बीजेपी कारकुनों को पसमांदा मुस्लमानों और कमजोर तबकात तक पहुंचना चाहिए।
