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आफताब और सुल्ताना : लाशें अतीया करने वाला मुल्क का पहला मुस्लिम जोड़ा

गोहाटी : आईएनएस, इंडिया 

आफताब अहमद और मशफका सुल्ताना मेडीकल साईंस के लिए लाशें अतीया करने वाले मुल्क के पहले मुस्लमान जोड़ा बन गए। दौलत गोहाटी में मजार रोड, हटेगाओं की रहने वाली मशफका सुल्ताना की लाश इतवार को गोहाटी मेडीकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) के हवाले की गई ताकि उसे मेडीकल साईंस के मुताला और तहकीक के मकसद से पेश किया जा सके। दरअसल 8 सितंबर की रात अपनी रिहायश गाह पर आखिरी सांस लेने के फौरन बाद उसकी दोनों आँखें अतीया कर दी गईं। मशफका सुल्ताना के शौहर आफताब उद्दीन अहमद, एक ब्यूरोक्रेट थे, जिनका इंतिकाल पहले हो गया। उन्होंने भी इसी मकसद के लिए 2011 में अपनी लाश अतीया की थी। एलोरा विज्ञान मंच एक रजाकार तंजीम, जिसने आसाम में आजा (अंग) और जिस्म के अतीया की तहरीक शुरू की है, तंजीम का कहना है कि आफताब उद्दीन अहमद और मशफका सुल्ताना मुल्क के पहले मुस्लमान जोड़े बन गए हैं जिन्होंने तिब्बी साईंस की तरक़्की के लिए मौत के बाद अपने जिस्म का अतीया किया।

ईवीएम ने एक बयान में कहा कि इन्सानियत के लिए इस मुहब्बत ने, जो साईंसी मिजाज से जुड़ा हुआ है, एक तरह की तारीख रकम की है और आजा और जिस्म के अतीया की तहरीक को तकवियत बखशी है। ईवीएम के तर्जुमान अशफाक अल रहमान ने आवाज दी वाइस को बताया कि हालिया बरसों में मुस्लमानों में जिस्म और आजा के अतीया के बारे में बेदारी उनके मजहबी अकाइद और अदम दिलचस्पी की वजह से काफी कम थी। ऐसे हालात में मरहूमा मशफका सुल्ताना और आफताब उद्दीन अहमद ने मेडीकल साईंस के मुताले और तहकीक के लिए लाश अतीया करके मुस्लमानों के लिए एक मिसाल कायम है।


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