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भारत जोड़ो यात्रा : ‘मिले कदम, जुड़े वतन’

उर्दू के हवाले से उठते सवालात

- एमडब्ल्यू अंसारी, (आईपीएस, रिटा. डीजीपी)

जिस तरह उतर प्रदेश के वजीर-ए-आला
 योगी आदित्य नाथ ने उर्दू जबान को
अपनाने की बात कही है, आने वाले वक़्त
में तमाम पार्टी के नेताओं और आला कमान को
ये बात माननी पड़ेगी और उर्दू को उसका हक
देना पड़ेगा।  पूरी दुनिया में अमनऔर शांति
कायम करने में उर्दू ही मददगार हो सकती है।
भारत की सबसे पुरानी पार्टी के जरीये भारत जोड़ो यात्रा जो गुजिश्ता 7 सितंबर से जारी है, में कांग्रेस के इश्तिहार पर भारत की तमाम भाषा नजर आ रही है लेकिन उर्दू जबान को नजरअंदाज कर दिया गया है जिसे लेकर मुल्कभर में उर्दू दां और मुहब्बान-ए-उर्दू कांग्रेस से सवाल कर रहे हैं कि उर्दू जबान में नारे या गीत तो गाए जा सकते हैं लेकिन बैनर और फ्लेक्स पर उर्दू के रस्मुल खत में ‘लोगो’ या ‘नारा’ क्यों नहीं है जबकि दीगर 20-22 भाषाओं में ‘लोगो’ और ‘नारा’ नजर आ रहे हैं।  

उर्दू दां सवाल कर रहे हैं कि 27 मार्च 2022 को उर्दू सहाफत के दो सौ साल मुकम्मल होने पर भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में जश्न मनाया गया तो आखिर कांग्रेस ने इस तरह की अनदेखी क्यों की।  

इस हवाले से कई सहाफी सवाल कर रहे हैं कि आखिर कांग्रेस पार्टी ने ऐसा क्यों किया। क्या कांग्रेस के चोटी के नेताओं और कांग्रेस पार्टी के आला कमान के पास इसका कोई जवाब है। 

उर्दू सहाफत के दो सौ साल मुकम्मल होने पर भोपाल के तमाम उर्दू दां और मुहब्बाने उर्दू ने इसका जश्न धूमधाम से मनाया। यहां तक कि यूएनओ ने भी उर्दू जबान को यूएनओ की दफ़्तरी जबान में शामिल कर लिया है। क्या इन बातों से कांग्रेस पार्टी बे-खबर है। 

कांग्रेस कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो मुहिम चला रही है। इस राह में कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां उर्दू का गलबा है, फिर कांग्रेस उर्दू भाषी लोगों को उर्दू के बगैर कैसे एकजुट कर पाएगी। कांग्रेस को ये मालूम होना चाहिए कि उर्दू जबान तमाम महफिलों की शान है। कांग्रेस को अपनी इस गलती को फौरन दुरुस्त कर लेना चाहिए वर्ना उर्दू अपनी ताकत के दम पर कांग्रेस का पीछा करती रहेगी। 



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