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मदारिस के सर्वे पर उठे सवाल
रियासत में है 16 हजार मदारिस
सिर्फ 550 मदारिस को मिलता है ग्रांट
बाकी मदारिस जकात और चंदे की रकूम से चलते हैं

नई दिल्ली : आईएनएस, इंडिया
यूपी में गैर मंजूरशुदा मदारिस के सर्वे का हुक्म योगी हुकूमत ने सादर कर दिया है, और अब इस हुक्म के खिलाफ आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं।
एक तरफ जहां रुक्न पार्लियामेंट बैरिस्टर असद उद्दीन उवैसी ने गैर मंजूर शुदा मदारिस के सर्वे को 'छोटा एनसी' करार दिया है, वहीं तंजीम उलमाए इस्लाम दरगाह आला हजरत बरेली शरीफ के कौमी जनरल सेक्रेटरी मौलाना शहाब उद्दीन रिजवी बरेलवी ने अपने एक बयान में कहा है कि योगी हुकूमत 15 हजार मदारिस को बंद करना चाहती है।
एक रिपोर्ट में मौलाना शहाब उद्दीन के हवाले से लिखा गया है कि उतर प्रदेश में तकरीबन 16 हजार मदारिस हैं, जिनमें से सिर्फ 550 मदारिस को ग्रांट मिलता है। यानी हुकूमत इन मदारिस का खर्च उठाती है और यहां पढ़ाने वाले असातिजा को तनख़्वाह देती है। बाकी के तकरीबन 15000 मदारिस मुस्लमानों के जकात और चंदे की रकूम से चलते हैं। मौलाना शहाब उद्दीन ने योगी हुकूमत की नीयत पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हुकूमत के जरीया गैर मंजूर शुदा मदारिस का सर्वे कराए जाने का हुक्म फिक्रअंगेज है। अगर इन मदारिस को बंद करने की कोशिश हुई तो मुस्लिम बच्चों को तालीम मिलने में काफी दिक़्कत होगी।
दीनी व दुनियावी तालीम दी जाती है
मौलाना शहाब उद्दीन ने मदारिस को सियासत से दूर रखने की अपील करते हुए कहा कि हुकूमत चाहे तो सभी मदारिस में अपने लोगों को तायनात कर दे और जांच करवा ले कि वहां पर क्या होता है। उन्होंने बताया कि मदारिस में दीनी और दुनियावी दोनों तरह की तालीम दी जाती है। मदारिस में उर्दू, अरबी, फारसी, अंग्रेजी, साईंस और रियाजी की तालीम दी जाती है। इसके इलावा आईटीआई और जीटीआई के अलावा कम्पयूटर की भी तालीम दी जाती है। लेकिन मदारिस के बारे में कुछ इसी तरह का नजरिया आम कर दिया गया है, जो सरासर गलत है। मौलाना शहाब उद्दीन ने आसाम का तजकिरा भी अपने बयान में किया।
उन्होंने इल्जाम आइद किया कि वहां के वजीर-ए-आला मुस्लमानों से नफरत करते हैं, जिस वजह से वहां के 4 मदारिस पर बुलडोजर चला दिया गया है। हालाँकि आज तक किसी भी मदरसे में ये जानकारी नहीं मिल सकी है कि वहां पर किसी का दहश्तगरदों से ताल्लुक है। ना ही कोई मौलवी अब तक उसमें शामिल पाया गया है।