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दुनिया की आबादी में हो रहा मुसलसल इजाफा, नई मुश्किलात और मौके


न्यूयार्क : आईएनएस, इंडिया

अकवाम-ए-मुत्तहिदा (संयुक्त राष्टÑ) के आलमी आबादी के ताजा-तरीन तखमीने (अनुमान) के मुताबिक आबादी 2050 तक 8.5 अरब और 2080 तक 10 अरब से ज्यादा हो जाएगी। ये इजाफा अहम इकतिसादी (आर्थिक) और माहौलियाती (पर्यावरण) असरात को साथ लेकर आएगा। हालांकि पूरी दुनिया में आबादी की बढ़ोतरी यकसां तौर पर नहीं हुई है। मशरिकी (पूर्व) और जुनूब-मशरिकी (दक्षिण-पूर्व) एशिया समेत कुछ खितों की आबादी के सिकुड़ जाने की तवक़्को (उममीद) है, जबकि शुमाली (उत्तर) अमरीका और यूरोप में बहुत कम शरह पर इजाफे़ की तवक़्को है। 

आबादी में सबसे ज्यादा इजाफा सहरा अफ्रÞीका और वसती और जुनूबी एशिया में होगा। 8 अरब की हद को उबूर (पार) करने का ये इजाफा इस हकीकत से पर्दा उठाता है कि आलमी सतह पर आबादी 1950 की दहाई के बाद सबसे सुस्त रफ़्तारी से बढ़ रही है। इस वक़्त कुल आबादी में से दो तिहाई ऐसे खितों में रहते हैं जहां तौलीद (जन्म) की शरह, एक औरत की पैदाइश के हिसाब से जांची जाती है, जो 2.1 की शरह (दर) से नीचे गिर गई है। बहुत से मुआमलात में, इस गिरती हुई शरह की वजह हुकूमती पालिसीयां रही हैं। सबसे ज्यादा इजाफा आठ मुल्कों में मुतवक़्के है, जिनमें भारत समेत जमहूरी कांगो, मिस्र, ईथोपीया, नाईजीरिया, पाकिस्तान, फिलपाइन और मुत्तहदा जमहूरीया तनजानिया शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि वो ममालिक जो मजमूई आबादी (कुल जनसंख्या) के हवाले से काम करने की उम्र के लोगों की तादाद में इजाफे़ के मुतमन्नी (इच्छुक) हैं, उन्हें चाहिए कि इन्सानी वसाइल (मानव संसाधन) की तशकील में सरमायाकारी (निवेश) करके ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाएं। 

इसी तरह मुम्किना फवाइद (संभावित लाभ) हासिल करने के लिए तालीम और सेहत, सनफी मुसावात (लैंगिक समानता) की तरफ पेश-रफ़्त और फायदामंद रोजगार की दस्तयाबी में अहम सरमायाकारी की जरूरत है। 

बूढ़ी हो रही आबादी

सब सहारा अफ्रÞीका के ममालिक के बरअक्स (उलट), मजमूई तौर (सामुहिक तौर) पर आबादी बूढ़ी हो रही है। 1980 और 2022 के दरमयान, 65 साल या इससे ज्यादा उम्र के लोगों की तादाद तीन गुना बढ़कर 77 करोड़ दस लाख हो गई है और 2030 तक 99 करोड़ 40 लाख और 2050 तक 1.6 अरब तक पहुंच जाने का इमकान है। कुछ इलाकों में दूसरों के मुकाबले में उम्र रसीदा अफराद (बुजुर्गों) की तादाद ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। 2050 तक, मशरिकी और जुनूब मशरिकी एशिया में 65 साल या इससे ज्यादा उम्र के लोगों की शरह (दर)13 फीसद से दोगुनी होकर 26 फीसद हो जाएगी। यूरोप और शुमाली अमरीका में इस वक़्त तकरीबन 19 फीसद आबादी 65 साल या इससे ज्यादा उम्र की है, और ये तनासुब (अनुपात) 2050 तक बढ़कर तकरीबन 27 फीसद होने की तवक़्को है। अकवाम-ए-मुत्तहिदा ने जोर दिया कि उम्र रसीदा आबादी वाले ममालिक को अपने अवामी प्रोग्रामों को बूढ़े अफराद के बढ़ते हुए तनासुब के मुताबिक ढालने के लिए इकदामात करने चाहिए, जिनमें समाजी तहफ़्फुज और पेंशन के निजाम, आलमी सेहत की देख-भाल और तवील मुद्दती निगहदाशत के निजाम का कियाम शामिल है। 

आबादी बढ़ने के साथ माहौल में पेचीदगियां पैदा हो रही

रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे आलमी आबादी में इजाफा जारी है, इससे मौसमियाती तबदीली के खिलाफ जंग में मुम्किना पेचीदगियां पैदा होती जा रही हैं। लोगों में इजाफे़ का मतलब है कि फिजा में ज्यादा ग्रीन हाउस गैसें खारिज हो रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 34 प्रतिशत आबादी में इजाफा खुद माहौलियाती नुक़्सान का बराह-ए-रास्त सबब नहीं हो सकता। इसके बावजूद ये मसले को मजीद संगीन बना सकता है या उसके जाहिर होने के वक़्त को तेज कर सकता है, ताहम उसका इन्हिसार (आधार) जेरे गौर टाइम फ्रे़म, दस्तयाब टैक्नोलोजी, आबादियाती, समाजी और इकतिसादी हालात पर मुनहसिर है। रिपोर्ट में ये तजवीज किया गया है कि सबसे ज्यादा तरक़्की याफताह ममालिक को बोझ उठाना चाहिए। जबकि तमाम ममालिक को मौसमियाती तबदीलीयों से निमटने और माहौलियात के तहफ़्फुज के लिए इकदामात करने होंगे, उनमें बड़ा हिस्सा तरक़्की याफताह ममालिक का होना चाहिए, जिनके माद्दी वसाइल की फी कस खपत आम तौर पर सबसे ज्यादा है। तरक़्की याफताह ममालिक पर इन्सानी मआशी सरगमीर्यों को माहौलियाती इन्हितात से दोगुना करने के लिए हिक्मत-ए-अमली को नाफिज करने की सबसे बड़ी जिÞम्मेदारी आइद होती है।


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