अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी
नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक अजऱ्ी में कहा गया है कि इस बात को साबित करने के लिए बहुत ज्यादा शवाहिद मौजूद हैं कि मस्जिद में बाकायदगी से नमाजें अदा की जाती थीं, जबकि मुल्हिका इलाकों में दीगर ढाँचों को मर्कजी तौर पर महफूज यादगार करार दिया गया था, दरखास्त में कहा गया है कि नमाज के इनइकाद के सिलसिले में अमन-ओ-अमान में कोई खलल नहीं पड़ा है। इस पर समाअत करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने जुमेरात को मर्कज और आरक्योलोजीकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) को जुनूबी दिल्ली में कुतुबमीनार के मशरिकी दरवाजे से मुत्तसिल मस्जिद में नमाज की मुबय्यना रोकथाम को चैलेंज करने वाली एक अर्जी का जवाब देने का वक़्त दिया है।
जस्टिस मनोज कुमार ओहरी को मर्कज और एएसआई के वकील ने बताया कि वो इस मुआमले पर हिदायात लेंगे जिसके बाद अदालत 25 जुलाई को मुआमले की मजीद समाअत करेगी। समाअत के दौरान, अदालत ने ये भी जानने की कोशिश की कि क्या वक़्फ बोर्ड ने हुक्काम से कोई नुमाइंदगी की है और बताया गया कि उन्होंने कई नुमाइंदगी की हैं। वक़्फ बोर्ड की मैनेजिंग कमेटी ने जिसकी नुमाइंदगी एडवोकेट एम सूफियान सिद्दीकी के जरीये की गई, अर्ज़ किया कि ये मसला 'कुतुब अहाते के अंदर वाके मुग़्लिया दौर की मस्जिद से मुताल्लिक है लेकिन कुतुब एनक्लोजर से बाहर है।