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इस्पात नगरी का रोचक इतिहास दर्ज है किताब 'भिलाई जिंदाबाद' में : उमाकांत

bakhtawar adab, nai tahreek, hamza travel tales

भिलाई के इतिहास को जानने के लिए हमारी अगली पीढ़ी के पास है बेहतर माध्यम : मेश्राम
सेक्टर-4 में आयोजित समीक्षा गोष्ठी में बदलते भिलाई की चुनौतियों पर भी हुई चर्चा

✅ नई तहरीक : भिलाई 

    मूलनिवासी कला, साहित्य और फिल्म फेस्टिवल भिलाई, डॉ आंबेडकर एग्जीक्यूटिव फ्रेटरनिटी, भिलाई. डा. आंबेडकर वेलफेयर सोसायटी, छत्तीसगढ़ और एनस्टेप के संयुक्त तत्वावधान में विगत दिनों आयोजित समीक्षा गोष्ठी में लेखक व पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन की हालिया प्रकाशित किताब 'भिलाई जिंदाबाद, कुछ किस्से-कुछ कहानियां' का विमोचन हुआ। 

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    सेल एससी, एसटी, ओबीसी फेडरेशन भवन, सड़क नंबर 8, सेक्टर 4 में आयोजित समीक्षा गोष्ठी में प्रमुख वक्ताओं ने किताब को लेकर अपने विचार साझा करते हुए भिलाई को जानने-समझने के लिए इसे एक जरूरी किताब बताया।
    अतिथियों के स्वागत उपरांत आधार वक्तव्य रखते हुए प्रसिद्ध कहानीकार मिर्जा हफीज बेग ने कहा, कई मायनों में उन्हें यह किताब अपनी आपबीती भी लगती है। उन्होंने कहा, भिलाई में जन्म लेने और भिलाई स्टील प्लांट का सेवानिवृत्त कर्मी होने के नाते इनमें से बहुत से घटनाक्रम से वे खुद रूबरू हुए है। उन्होंने कहा कि यह किताब लेखक की पिछली 'कृति वोल्गा से शिवनाथ' तक के आगे का सिलसिला है और उसमें रह गई कमियों को पूरा करती है।
    वरिष्ठ रंगकर्मी राकेश बम्बार्डे ने कहा कि जिन्हें अपने शहर भिलाई से प्यार है और जो भिलाई को जानना-समझना चाहता हैं, वे इस किताब को जरूर पढ़ेंगे। शायर मुमताज ने भिलाई की संस्कृति को किताब के माध्यम से सामने लाने के लिए लेखक की सराहना की और चंद अशआर सुनाए। ऑल पीएसयू एससी-एसटी एम्पलाइज फेडरेशन के चेयरमैन सुनील हरिशचंद्र रामटेके ने कहा कि लेखक ने पिछली किताब 'वोल्गा से शिवनाथ तक' में भिलाई के योगदान पर भारतीय और रूसियों के योगदान पर बेहद रोचक ढंग से तथ्यों को रखा था। वही शैली इस किताब में बरकरार है।
    उन्होंने आगे कहा, जिस तरह लेखक ने भिलाई के शुरूआती दौर से अब तक की  तमाम हस्तियों से मिलकर उनका साक्षात्कार सबके सामने प्रस्तुत किया है, यह सबके बस की बात नहीं। उन्होंने दोहराया कि आज जिस तरह भिलाई के सामने नए दौर की चुनौतियां है, उनका सामना करने के लिए हमें अपने इतिहास के बारे में जानना जरूरी है। 
    भिलाई स्टील प्लांट के ऊर्जा प्रबंधन विभाग में जनरल मैनेजर कमल टंडन ने कहा कि भिलाई सही मायनों में लघु भारत है और इसका रोचक इतिहास जानने के लिए यह किताब सहायक होगी। कवि लक्ष्मीनारायण कुम्भकार ने कहा कि इतिहास को रोचक ढंग से प्रस्तुत करना भी एक चुनौती है जिसे लेखक ने बखूबी पूरा किया है।
    आकाशवाणी रायपुर के कार्यक्रम प्रमुख पंकज मेश्राम ने कहा कि एक पत्रकार का न केवल स्वतंत्र होना जरूरी है बल्कि उसका निर्भिक और निष्पक्ष होना भी जरूरी है। ये सारे गुण लेखक मुहम्मद जाकिर में मौजूद है। उन्होंने कहा, भिलाई पर अगर प्रमाणिक जानकारी चाहिए तो आपको लेखक की इस किताब से जरूर रूबरू होना चाहिए।
    संचालन कर रहे सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर विश्वास मेश्राम ने कहा कि जिस भिलाई को हमने देखा और जिया है, आज वह बदल रहा है।  आज के भिलाई की जो तस्वीर हम देखते हैं, उसे देखकर बहुत खुशी नहीं होती बल्कि एक दर्द सा उठता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में जब  हमारी अगली पीढ़ी हमारे भिलाई को ढूंढना चाहेगी तो वो उन्हें इस किताब में मिलेगी।
    बीएसपी पावर इंजीनियरिंग एंड मेंटेनेंस विभाग में जनरल मैनेजर पीएस खोब्रागड़े ने कहा कि आज सोशल मीडिया और एआई का दौर है। इंटरनेट पर हम तलाशेंगे तो इतनी प्रमाणित जानकारी नहीं मिल सकती जितनी लेखक ने अपनी किताब 'भिलाई जिंदाबाद' में तथ्यों के साथ जुटा कर दी है। 
    भिलाई स्टील प्लांट टेलीकम्युनिकेशन विभाग के पूर्व प्रमुख और रिटायर जनरल मैनेजर एल. उमाकांत ने कहा कि लेखक ने जिन घटनाक्रमों को इस किताब में उल्लेखित किया है, उनमें से ज्यादातर के वे गवाह रहे हैं। उन्होंने बताया कि 6 जनवरी 1986 को जिस वक्त हादसा हुआ, तब भिलाई होटल में दूरसंचार विभाग का एक कार्यक्रम चल रहा था और एमडी केआर संगमेश्वरन भी हमारे साथ उस कार्यक्रम में ही थे। हम सबने उस धमाके की आवाज सुनी थी। उन्होंने कहा कि भिलाई को जानने-समझने के लिए इस किताब से बेहतर माध्यम और कोई नहीं हो सकता। 


    किताब की सृजन यात्रा पर चर्चा करते हुए लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने उम्मीद जताई कि पाठकों का प्रोत्साहन उन्हे आगे भी भिलाई के रोचक इतिहास से रूबरू कराने की प्रेरणा देगा। इस अवसर पर भिलाई नगर मस्जिद ट्रस्ट के सदर मिर्जा आसिम बेग, रंगकर्मी एल. रुद्र मूर्ति, मोहन कुमार नामदेव, मुक्तानंद साहू, बिनितोष बाला, गंगा भाऊ जांभुलकर, विजया जांभुलकर, संगीता मेश्राम, उषा मेश्राम, फैजान खान, शारिक खान, चित्रसेन कोसरे, जयश्री मोहन नागदेवे, राजेंद्र सुनगरिया और गजेंद्र सायतोड़े सहित अनेक लोग मौजूद थे। 
    अंत में धन्यवाद ज्ञापन बीएसपी कर्मचारी और रंगकर्मी वासुदेव ने दिया।

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