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यौमे जम्हूरिया के मौके पर हुब्बुल वतनी के रंग में रंगा जामा मस्जिद कैंपस

 शाअबान उल मोअज्जम, 1447 हिजरी 

   फरमाने रसूल     ﷺ .........................................

जिस शख्स का मकसद आखेरात की बेहतरी हो, अल्लाह ताअला उसके दिल को गनी कर देता है, उसके बिखरे हुए कामों को समेट देता है और दुनिया ज़लील हो कर उसके पास आती हैं।

- तिर्मीज़ी शरीफ


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✅ मोहम्मद जुनैद कुरैशी : बालोद

    यौम-ए-जम्हूरिया के मौके पर जामा मस्जिद कैंपस में 26 जनवरी को मुनाकिद परचमकुशाई की तकरीब में इमाम-ओ-ख़तीब शकील खान ने परचमकुशाई कर उसे सलामी दी। जिसके बाद हाजरीन ने इज्तेमाई तौर पर कौमी तराना पेश कर मुल्क के तंई अपनी वफादारी का इजहार किया। 
    इस मौके पर साबिक सदर खलील अहमद, ऑल मुस्लिम वेलफेयर फाउंडेशन, दुर्ग संभाग सदर हाजी जाहिद अहमद खान, मोहम्मद हुसैन बाबा, संभाग सेक्रेटरी रहीम मोहम्मद, सईद तिगाला, सलीम खान, उस्मान उल्ला खान, अरमान अश्क, जाबिर भाई, मोहम्मद आबिद, नायब इमाम मुस्ताक पटेल, बबलू भाई, मोहम्मद आबिद समेत कसीर तादाद में अवाम मौजूद थी।
    परचम कुशाई के बाद तकरीब से खिताब करते हुए इमाम-ओ-खतीब शकील खान ने मुल्क की यकजहती और आईन की गरिमा बनाए रखने का पैगाम दिया। उन्होंने कहा, हमें अपने मुल्क के क़ानून, आईन और भाईचारे की हिफ़ाज़त करनी चाहिए। यौमे जम्हूरिया हमें याद दिलाता है कि हम सब एक हैं और इस वतन की तरक़्क़ी में मिल-जुलकर काम करना हमारी ज़िम्मेदारी है।
    तकरीब में मौजूद हाजरीन ने मुल्क की यकजहती और भाईचारगी को बनाए रखने का अज्म किया। 


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