शाअबान उल मोअज्जम, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ ------------------
"तुम अपने लिए भलाई के अलावा कोई और दुआ ना करो क्योंकि जो तुम कहते हो उस पर फरिश्ते आमीन कहते है।"
- मुस्लिम
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कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को दिया शिक्षा, आत्मविश्वास और सामाजिक एकता का संदेशशहर में पहली बार हुआ ऐसा व्यापक प्रयास, लोगों की सराहना
✅ नई तहरीक : बिलासपुर
शिक्षा को सामाजिक उत्थान का सशक्त माध्यम बनाते हुए छत्तीसगढ़ मुस्लिम एजुकेशन वेलफेयर, बिलासपुर द्वारा कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए न केवल शैक्षणिक दृष्टि से बल्कि जागरूकता, आत्मविश्वास और सामाजिक एकता के लिहाज़ से शहर में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर प्रेरणादायी कार्यक्रम छू-लो-आसमान का भव्य आयोजन किया गया जिसे सहारवासियों और शिक्षा जगत ने ऐतिहासिक पहल बताया।कार्यक्रम की शुरुआत सुन्नी हुसैनी मस्जिद के ख़तिबो-इमाम हाफ़िज़ सैयद जाहिर आगा एवं नगीना मस्जिद, तारबहार के ख़तिबो-इमाम हाफ़िज़ आरिफ़ अंजुम साहब द्वारा क़ुरआन की तिलावत और दुआ-ए-ख़ैर से हुई। इस अवसर पर बिलासपुर के विभिन्न स्कूलों से आए सैकड़ों छात्र-छात्राएँ एवं उनके परिजन उपस्थित रहे, जिससे सभागार प्रेरणा और उम्मीद से भर उठा।
कार्यक्रम का संचालन मेजर डॉ. आशीष शर्मा (प्रोफेसर, डीपी विप्र महाविद्यालय) एवं उमाशंकर पांडे ने किया। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, शॉल और सम्मान-चिन्ह भेंट कर किया गया।
शिक्षा ही समाज की सबसे बड़ी ताकत
मुख्य अतिथि प्रो वाइस चांसलर, एमिटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरुण पटनायक ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत है। जो विद्यार्थी ईमानदारी, मेहनत और अनुशासन अपनाता है, उसका भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल होता है। हर विद्यार्थी में नेतृत्व क्षमता होती है, बस-उसे सही दिशा और अवसर की आवश्यकता होती है।विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ट्रैफिक) रामगोपाल करियारे ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि छू-लो-आसमान जैसे कार्यक्रम बच्चों को आधुनिक शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और चरित्र निर्माण का अवसर देते हैं। शिक्षित, अनुशासित और जागरूक युवा ही देश की उन्नति के मजबूत स्तंभ बनेंगे।
सपनों, मेहनत और आत्मविश्वास की उड़ान
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मोटिवेटर एवं डिप्टी सीएमडी, एसईसीएल जाकिर हुसैन ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा, बच्चों का भविष्य सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि उनके सपनों, मेहनत और आत्मविश्वास में छिपा होता है। शिक्षा केवल डिग्री नहीं देती, यह सोचने की शक्ति, चुनौतियों से लड़ने का साहस और सही दिशा में आगे बढ़ने की रोशनी देती है। हर बच्चा आसमान छू सकता है,बस-रोज़ थोड़ा-सा आगे बढ़ने का संकल्प लें। उनके शब्दों ने विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भर दिया। विशिष्ट अतिथि जसबीर सिंह चावला, समाजसेवी ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन की कुंजी बताया।हर हाथ में किताब, हर दिल में हिम्मत
कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष मोहम्मद सरफराज पाशा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुस्लिम एजुकेशन वेलफेयर बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को जगाने का सार्थक मंच है। हमारा लक्ष्य है, हर बच्चे के हाथ में किताब, दिल में हिम्मत और आँखों में बड़े सपने हों। उन्होनें आगे कहा, असफलता से डरें नहीं, असफलता ही आपको ऊँचाइयों तक ले जाने की सीढ़ी बनती है। उन्होंने आश्वस्त किया कि संस्था बच्चों की शिक्षा के लिए सदैव अग्रसर रहेगी।कार्यक्रम के समापन अवसर पर संस्था के सचिव एमएन रिज़वान ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल शिक्षा का संदेश नहीं, बल्कि बच्चों को नई दिशा देने का संकल्प है। बच्चों की शिक्षा किसी एक परिवार या समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की घोषणा करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।
सहयोग और सराहना
आयोजन को सफल बनाने में संस्था के उपाध्यक्ष मोहम्मद रफ़ीक (अरब साउंड) का सराहनीय योगदान रहा। साथ ही मोहम्मद इमरान, कार्यक्रम संरक्षक मोहम्मद निसार, हाजी आमिर खान, हाजी शेख रफ़ीक, ग़ौस मोहम्मद, सैय्यद रज़्ज़ाक आल, यासीन कुरैशी, सैय्यद महफूज़ अली, मोहम्मद मुकीम, अब्दुल अलीम, मोहम्मद नावेद सहित अनेक सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।बताते चलें कि शिक्षा जगत में पहली बार बिलासपुर शहर में इस स्तर का शैक्षणिक-सामाजिक आयोजन हुआ, जिसकी संगठन के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों की सहारवासियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
छू-लो-आसमान न सिर्फ एक कार्यक्रम रहा, बल्कि यह भविष्य निर्माण की एक मजबूत नींव बनकर उभरा।
