शाअबान उल मोअज्जम, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ -----------------------
जिसे अपनी नेकी से खुशी मिले और गुनाहों से रंज लाहक हो, हकीकत में वही मोमिन है।- तिरमिजी शरीफ
✅ मुहम्मद जाकिर हुसैन : भिलाई
शबे बराअत के मौके पर 3 फरवरी, बरोज मंगल को मस्जिदों, घरों और कब्रिस्तान में खास इबादत होगी। कब्रिस्तान हैदरगंज इंतेजामिया कमेटी, कैम्प-1 की ओर से इस मौके पर मुतअददिद प्रोग्राम मुनाकिद किए गए हैं। शहर की तमाम मस्जिदों और कब्रिस्तान में रोशनी की गई है।कब्रिस्तान हैदरगंज के हॉल में मंगल की सुबह 7:30 बजे से कुरआन ख्वानी व दुरूद ख्वानी का सिलसिला शुरू होगा। सुबह 10 बजे फातिहाख्वानी और इज्तेमाई दुआएं होगी। शाम को जलसे की शुरूआत तकरीर व नात से होगी। यहां कब्रिस्तान हैदरगंज में रात तकरीबन 09:30 बजे इमाम ए आज़म अबू हनीफा कॉन्फ्रेंस व महफिल ए शबे बराअत होगी, जिसमें मेहमान ए खुसूसी सैयद मुहम्मद महमूद अशरफ अशरफी, अल जीलानी, किछौछा शरीफ (उत्तर प्रदेश) होंगे।
शाम की नमाज में होगी खास इबादत
जामा मस्जिद, सेक्टर-6 में मगरिब की नमाज के ठीक बाद सूरए यासीन सुनी जाएगी। इसी दौरान खुसूसी नवाफिल और दुआ की जाएगी। शहर की दीगर मस्जिदों के अलावा लोग घरों में भी नफिल नमाज की अदायगी करेंगे।कब्रिस्तान में किए गए जरूरी इंतजाम
भिलाई नगर मस्जिद ट्रस्ट के मातहत हैदरगंज कब्रिस्तान इंतजामिया कमेटी ने शबे बराअत को देखते हुए तैयारी पूरी कर ली है। कब्रिस्तान की सफाई करवाई गई है और चारों तरफ रोशनी के इंतजाम किए गए हैं। जिससे लोगों को अपने मरहूमीन की कब्र तक पहुंचने में सहूलियत हो। वज़ू के पानी के लिए बोरिंग और पानी की बड़ी टंकी का इंतजाम किया गया है। कब्रिस्तान की दीवारों और मज़ार के साथ-साथ, जनाज़े की नमाज़ और दीनी प्रोग्राम के लिए बनाए गए डोम शेड व गोरकुन के घर का भी रंग रोगन करवाया गया है।गुनाहों से बरी होने की रात है, शबे बराअत: मौलाना इकबाल
जामा मस्जिद, सेक्टर-6 के इमाम-ओ-खतीब मौलाना मोहम्मद इकबाल अंजुम हैदर अशरफी जामई ने बताया कि शब के मायने रात और बराअत के मायने बरी होने से है। शबे बराअत की रात बहुत बरकतों और अल्लाह को राजी करने वाली रात है। हदीस में आया है कि पैगम्बर हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) शबे बराअत में जन्नतुल बकी जा कर दुआएं करते थे। उन्ही के रास्ते पर चलते हुए लोग शबे बराअत पर कब्रिस्तान जाकर अपने मरहूमीन की कब्र पर दुआएं करते हैं।
मौलाना अशरफी ने कहा कि यही वह रात है, जब अल्लाह तआला रहमत के दरवाजे खोल देता है और हर उस शख्स को बख्श देता है, जिसने उसके साथ किसी को शरीक नहीं ठहराया। उन्होंने कहा कि इस रात लोग अपने तमाम छोटे-बड़े गुनाहों पर शर्मिंदा होकर अल्लाह की बारगाह में तौबा करें तो उसकी तौबा जरूर कुबूल होती है।
