मोहर्रम-उल-हराम - 1446 हिजरी
हदीस-ए-नबवी ﷺ
ह्यजो शख्स ये चाहता है कि उसके रिज्क में इजाफा हो, और उसकी उम्र दराज हो, उसे चाहिए कि रिश्तेदारों के साथ हुस्न सुलूक और एहसान करे।ह्ण
- मिश्कवात शरीफ
✅ दिल्ली : आईएनएस, इंडिया
दिल्ली की कडकडुमा कोर्ट ने दिल्ली फ़साद-2020 से जुड़े एक अहम मुक़द्दमें में छः मुल्ज़िमान को बाइज़्ज़त बरी कर दिया है। मुल्ज़िमान हाशिम अली, अबू बकर, मुहम्मद अज़ीज़, राशिद अली, नजम उद्दीन उर्फ़ भोला और मुहम्मद दानिश पर हंगामा-आराई, चोरी, तोड़फोड़ और आतिशज़नी जैसे संगीन इल्ज़ामात आइद किए गए थे। दिल्ली पुलिस ने सभी छः मुल्ज़िमीन के खिलाफ दफ़ा 148, 380, 427, 435 और 436 के साथ दफ़ा 149 और 188 के तहत मुक़द्दमा दर्ज किया था। छः मुस्लिम नौजवानों पर इल्ज़ामात आइद किए गए थे कि उन्होंने 25 फरवरी 2020 को शिव विहार में एक घर को लूटा, तोड़फोड़ की और उसे नज़र-ए-आतिश किया था जिसके बाद करावल नगर थाना की बुनियाद पर मुक़द्दमा दर्ज किया गया था।
हालांकि मामले में अदालत ने मुशाहिदा किया कि इस्तिग़ासा ने मुल्ज़िम के ख़िलाफ़ सबूत के तौर पर डीजीटल वीडीयो रिकार्डर जमा किया लेकिन वीडीयो में किसी भी मुल्ज़िम की शिनाख़्त करने के लिए कोई गवाह मौजूद नहीं है। अदालत ने कहा कि केस के तफतीशी अफ़्सर ने वीडीयो क्लिप में किसी भी मुल्ज़िम की साईंसी जांच के ज़रीया या मुल्ज़िमीन की नमूना तस्वीर के साथ वीडीयो का मुवाज़ना कर उसकी तसदीक़ करने कोई क़दम नहीं उठाया और ये साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किए कि वीडीयोज़ में मुल्ज़िमीन दिखाई दे रहे हैं। वहीं काल डीटेल रिकार्ड (सीडीआर) के ज़रीया मुल्ज़िमीन की सही जगह का ताय्युन नहीं किया गया और ना ही वाक़िया में मुल्ज़िमीन के मुलव्वस होने से मुताल्लिक़ कोई ठोस सबूत पेश किए।
मुअज़्ज़िज़ जज ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि 'मेरी राय में मुल्ज़िमान के ख़िलाफ़ कोई काबिल एतराज़ सबूत नहीं है और इस केस में मुल्ज़िमान के ख़िलाफ़ लगाए गए इल्ज़ामात बिलकुल साबित नहीं होते जिसके बाद अदालत ने हाशिम अली, अबूबकर, मुहम्मद अज़ीज़, राशिद अली, निज़ाम उद्दीन और मुहम्मद दानिश को बरी कर दिया।
हालांकि मामले में अदालत ने मुशाहिदा किया कि इस्तिग़ासा ने मुल्ज़िम के ख़िलाफ़ सबूत के तौर पर डीजीटल वीडीयो रिकार्डर जमा किया लेकिन वीडीयो में किसी भी मुल्ज़िम की शिनाख़्त करने के लिए कोई गवाह मौजूद नहीं है। अदालत ने कहा कि केस के तफतीशी अफ़्सर ने वीडीयो क्लिप में किसी भी मुल्ज़िम की साईंसी जांच के ज़रीया या मुल्ज़िमीन की नमूना तस्वीर के साथ वीडीयो का मुवाज़ना कर उसकी तसदीक़ करने कोई क़दम नहीं उठाया और ये साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किए कि वीडीयोज़ में मुल्ज़िमीन दिखाई दे रहे हैं। वहीं काल डीटेल रिकार्ड (सीडीआर) के ज़रीया मुल्ज़िमीन की सही जगह का ताय्युन नहीं किया गया और ना ही वाक़िया में मुल्ज़िमीन के मुलव्वस होने से मुताल्लिक़ कोई ठोस सबूत पेश किए।
मुअज़्ज़िज़ जज ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि 'मेरी राय में मुल्ज़िमान के ख़िलाफ़ कोई काबिल एतराज़ सबूत नहीं है और इस केस में मुल्ज़िमान के ख़िलाफ़ लगाए गए इल्ज़ामात बिलकुल साबित नहीं होते जिसके बाद अदालत ने हाशिम अली, अबूबकर, मुहम्मद अज़ीज़, राशिद अली, निज़ाम उद्दीन और मुहम्मद दानिश को बरी कर दिया।