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रूहानी इलाज : ब्रेस्ट, यूटरस कैंसर बचने के लिए करें ये अमल

 9 शाअबानुल मोअज्जम 1444 हिजरी
2 मार्च 2023

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रूहानी इलाज :
रूहानी इलाज

जो इस्लामी बहनें ब्रेस्ट और यूट्रस कैंसर या दीगर जानलेवा बीमारियों से बचना चाहें, वे रोजाना (फजर में) या किसी वक्त ‘सूरह मआरिज’ एक बार पढ़कर आधा कप पानी में दम करके पी लिया करें। इंशा अल्लाह वे जानलेवा बीमारियों से बचीं रहेंगी।

बड़ों की ताजीम और बच्चों पर रहम करें

हजरत उबादा बिन सामित (रजियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: जो शख़्स हमारे बड़ों की ताजीम (इज्जत) न करे, हमारे बच्चों पर रहम न करे और हमारे आलिम का हक न पहचाने, वह मेरी उम्मत में से नहीं है। (मुस्नद अहमद, तबरानी, मज्मउज़्जवाइद)

लड़कियों की खुशबख्ती के लिए 

घर की लड़कियां जवान होकर नेक, दीनदार, हयादार, पाकदामन, पर्दानशीं निकलें। मां-बाप की फरमाबरदार बनें। लड़कों से नाजायज दोस्ती व मेलजोल न रखकर घरवालों के पसंद के रिश्ते में शादी करें, इसके लिए ‘सूरह नूर’ एक बार पढ़कर बेटियों पर दम करें, दम किया पानी पिलाएं और दुआ कर लें। 90 दिन करना है।

जन्नत में दरख़्त लगाएं

हजरत अबू अय्यूब अन्सारी (रजियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूल अल्लाह हजरत मुहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) मेराज की रात हजरत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास से गुजरे, तो उन्होंने पूछा: ऐ जिब्रील! वह तुम्हारे साथ कौन हैं? जिब्रील अमीन ने फरमाया: मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) हैं। हजरत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने फरमाया- आप अपनी उम्मत से कहिए कि वह जन्नत के पौधे (दरख़्त) ज्यादा से ज्यादा लगाएं, इसलिए कि जन्नत की मिट्टी उम्दा है और उसकी जमीन कुशादा है। पूछा : जन्नत के पौधे क्या हैं? इरशाद फरमाया- ‘ला हौल, व-ला कूव्वता इल्ला बिल्लाह’ पढ़ना। (मुस्नद अहमद, मज्मउज़्जवाइद)

माहे शाबान के रोजे

हजरत अनस (रजियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसल अल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) से सबसे अफजल रोजों के बारे में पूछा गया, तो आप (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने फरमाया: रमजान की ताजीम के लिए शाबान के रोजे। (तिर्मिजी)
हजरत आइशा सिद्दीका (रजियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) को माहे शाबान में रोजे रखना तमाम महीनों से ज्यादा पसन्दीदा था कि इसमें रोजा रखा करते फिर इसे रमजान से मिला देते। (अबू दाऊद)
हजरत आइशा सिद्दीका (रजियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) पूरे शाबान के रोजे रखा करते थे, और फरमाते, अपनी इस्तित़ाअ़त के मुताबिक अमल करो कि अल्लाह तआला उस वक़्त तक अपना फज्ल नहीं रोकता, जब तक तुम उकता न जाओ। (सहीह बुखारी)
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