नई दिल्ली : आईएनएस, इंडिया
मर्कजी हुकूमत ने इबादतगाहों के कानून के खिलाफ दायर दरखास्तों का जवाब देने सुप्रीमकोर्ट से मजीद वक़्त मांगा है। मर्कजी हुकूमत की जानिब से सॉलीसिटर जनरल तुषार महित ने कहा कि हुकूमत में आला सतह पर बातचीत चल रही है। जिसके बाद अदालत ने हुकूमत को जवाब दाखिल करने के लिए 12 दिसंबर तक का वक़्त दिया है।
केस की अगली समाअत जनवरी के पहले हफ़्ते में होगी। 12 अक्तूबर को सुप्रीमकोर्ट ने मर्कजी हुकूमत को इबादतगाहों के कानून के खिलाफ दायर दरखास्तों पर 31 अक्तूबर तक अपना जवाब दाखिल करने की हिदायत दी थी। 9 सितंबर को अदालत ने मर्कजी हुकूमत को नोटिस जारी किया था। अदालत ने जमुई उल्मा हिंद की तरफ से कानून की हिमायत में दायर दरखास्त पर भी नोटिस जारी किया था। ख़्याल रहे कि 8 सितंबर को बनारस के साबिक राजा काशी नरेश विभूति नारायण सिंह की बेटी कृष्णा प्रिया ने इबादत-गाहों के कानून को चैलेंज करते हुए एक नई दरखास्त दायर की है जिसमें कहा गया है कि काशी की राजशाही रियासत के साबिक हुकमरान काशी के तमाम मंदिरों के मुतवल्ली थे, इसलिए उन्हें काशी के शाही खानदान की जानिब से इस एक्ट को चैलेंज करने का हक है। एक दरखास्त एडवोकेट यश कुमार शुक्ला ने दायर की है। वे आयोध्या के हनूमान गढ़ी मंदिर के पुजारी भी रह चुके हैं। बीजेपी लीडर और वकील अश्वनी उपाध्याय ने भी इबादत-गाहों के कानून को चैलेंज करते हुए एक अर्जी दायर की है। जमई उलमा हिंद ने भी सुप्रीमकोर्ट में अर्ज़ी दाखिल की है। सुब्रामणियम स्वामी की जानिब से भी दरखास्त दायर की गई है।
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