नई दिल्ली : आईएनएस, इंडिया
2002 के गोधरा फसादाद के दौरान बिल्कीस बानो इजतिमाई इस्मतदरी मुआमले में कसूरवार करार दिए गए 11 अफराद की रिहाई के खिलाफ दाखिल अर्जी पर समाअत करने के लिए सुप्रीमकोर्ट ने 29 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है।
गुजरात हुकूमत ने अपने ऊपर लगाए जा रहे इस तरह के इल्जामात को गलत ठहराया जिसमें कहा जा रहा है कि बिल्कीस बानो के कसूरवारों को आजादी का अमृत महोत्सव प्रोग्राम के तहत छोड़ा गया है। हुकूमत का कहना है कि सुप्रीमकोर्ट के हुक्म के मुताबिक पूरी कानूनी कार्रवाई पर अमल करते हुए रिहाई हुई है। हुकूमत का ये भी कहना है कि अर्जी दहिंदा सियासी पार्टी से जुड़े हैं और किसी भी अर्जी दहिंदा का इस पूरे मुआमले से कोई रिश्ता नहीं है। वाजेह रहे कि सन 2002 के गुजरात फसादाद के दौरान बिल्कीस बानो पर 20 से जाइद फसादीयों ने हमला किया था। उस दौरान हामिला बिल्कीस बानो समेत कुछ दीगर खवातीन की इस्मतदरी की गई। मुल्जिमीन की तरफ से मुतास्सिरा फरीक पर दबाव बनाने की शिकायत मिलने पर सुप्रीमकोर्ट ने मुकद्दमा महाराष्ट्र मुंतकिल कर दिया था। 21 जनवरी 2008 को मुंबई की खुसूसी सीबीआई अदालत ने मुआमले में 11 लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। रवां साल 15 अगस्त को बिल्कीस बानो इस्मतदरी मुआमले के सभी 11 कसूरवारों को जेल से रिहा कर दिया गया जिस पर खूब हंगामा हुआ। गुजरात हुकूमत के इस फैसले के खिलाफ सीपीएम लीडर अली, समाजी कारकुन रूप रेखा वर्मा, रेवती लाल और तृणमूल कांग्रेस की लीडर महवा मोइत्रा ने सुप्रीमकोर्ट में अर्जी दाखिल की।
