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ढाका : आईएनएस, इंडिया
बंगलादेश ने कहा है कि मुल्क में 10 लाख से ज्यादा रोहंगया मुसलमानों का कैम्पों में तवील होता कयाम ढाका के लिए सलामती और इस्तिहकाम (स्थिरता) के हवाले से तशवीश (चिंता) का बाइस बन गया है। कैंपों में गुंजाइश से ज्यादा रोहंगया पनाहगुजीन भरे हुए हैं।
वजीर-ए-आजम शेख हसीना वाजिद ने पीर को कहा कि हमसाया (पड़ोसी) मुल्क मियांमार से आए रोहंगया पनाहगुजीनों की तवील मौजूदगी बंगला देश की मईशत (आर्थिक), माहौलियात (पर्यावरण), सलामती, समाजी और सियासी इस्तिहकाम पर संगीन असरात मुरत्तिब कर रही है। वे अमरीका और बंगला देश की मुशतर्का (संयुक्त) मेजबानी में मुनाकिद होने वाले, इलाके के 24 ममालिक से ताल्लुक रखने वाले फौजी हुक्काम के तीन रोजा इंडो पेसेफिक आर्मीज मैनिजमंट सेमीनार की इफ़्तिताही तकरीब (उदघाटन समारोह) से खिताब कर रही थीं। खबररसां इदारे एसोसीएटेड पे्रस के मुताबिक सेमीनार में शरीक ममालिक की फौजें आफात से निमटने के तरीका-ए-कार, बैन-उल-अकवामी जराइम, सलामती के मसाइल और खवातीन को बाइखतियार बनाने जैसे उमूर पर तबादला-ए-ख़्याल कर रही हैं।
बंगलादेश के आर्मी चीफ जनरल एसएम शफी उद्दीन अहमद ने बताया कि सेमीनार के शुरका (भागीदार) जिनमें अमरीका, कैनेडा, आस्ट्रेलिया, जापान, इंडोनेशिया, भारत, चीन और वियतनाम शामिल हैं, मुल्क में कायम बड़े रोहंगया पनाहगुजीन कैम्पों का दौरा करेंगे ताकि वो मुहाजिरीन की हालत-ए-जार का खुद मुशाहिदा कर सकें। फौजी रहनुमा के मुताबिक शुरका को कैम्पों में ले जाया जा रहा है ताकि उन पर मुहाजिरीन के बोहरान (परेशान) की संगीनी वाजेह हो सके और ये बताया जाए कि मुहाजिरीन की मियांमार वापसी क्यों जरूरी है। गुजिश्ता माह बंगला देश में सात लाख से ज्यादा रोहंगया पनाहगुजीनों की बड़े पैमाने पर नक़्ल मकानी (विस्थापन) के पाँच साल मुकम्मल हो गए हैं। ये मुहाजिरीन मियांमार की फौज की सख़्त पकड़ से फरार होकर बंगला देश पहुंचे थे। इस वक़्त बंगला देश मजमूई तौर पर 10 लाख से ज्यादा रोहंगया मुहाजिरीन की मेजबानी कर रहा है। वजीर-ए-आजम हसीना वाजिद ने कहा है कि रोहंगया पनाहगुजीनों की उनके वतन वापसी ही इस बोहरान का वाहिद हल है। लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि ढाका इन मुहाजिरीन को वापिस मियांमार जाने पर मजबूर नहीं करेगा।
ख़्याल रहे कि बंगला देशी हुक्काम ने चीन में होने वाले दो तरफा मुआहिदे के तहत मुहाजिरीन को वापिस भेजने की दो बार की गई कोशिशों की नाकामी पर मायूसी का इजहार किया है। रोहंगया मुस्लमान कहते हैं कि बौद्धमत के पैरोकारों की अक्सरीयती आबादी वाले उनके मुल्क मियांमार में हालात इंतिहाई खतरनाक हैं और वहां उन्हें बड़े पैमाने पर इमतियाजी सुलूक का सामना है। एपी के मुताबिक यूएस आर्मी पेसेफिक के कमांडिंग जनरल चार्लज ए फ्लिन ने सहाफियों को बताया कि वो पालिसी से मुताल्लिक ऐसे सवालात का जवाब नहीं दे सकते कि फौज रोहंगया पनाहगुजीनों को मियांमार वापिस भेजने में किस तरह मदद कर सकती है। लेकिन उन्होंने शुरका के पनाहगुजीन कैम्पों के दौरे का इंतिजाम करने पर बंगला देश का शुक्रिया अदा किया। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि वो बंगला देश की फौज के सरबराह के शुक्रगुजार हैं कि वो शुरका को कॉक्स बाजार ले गए ताकि वो बंगला देश की तरफ से पाँच साल तक फराहम की जाने वाली इन्सानी इमदाद की वुसअत को देख सकें।
याद रहे कि रोहंगया बोहरान को बैन अल-अकवामी (अंतरराष्टÑीय) अदालतों में ले जाया जा चुका है लेकिन मियांमार ने किसी भी किस्म की बदसुलूकी और तशद्दुद के इल्जामात से इनकार किया है। गुजिश्ता माह अमरीका के वजीर-ए-खारजा ने कहा था कि अमरीका रोहंगया पनाहगुजीनों और मियांमार के तमाम लोगों के लिए इन्साफ और एहतिसाब (जवाबदेही) को आगे बढ़ाने का अजम रखता है।
