कोह-ए-नूर समेत दीगर कीमती अश्या (चीजों) की वापसी का मुतालिबा
लंदन : आईएनएस, इंडिया
70 बरस तक दुनिया के बेशतर ममालिक पर हुक्मरानी करने वाली मल्लिका-ए-बर्तानिया अलीजाबेथ दोयम के इंतिकाल के बाद सोशल मीडीया पर कोह-ए-नूर टाप ट्रेंड कर रहा है, सारफीन (उपभोक्ता) की जानिब से बर्तानिया से कोह-ए-नूर हीरा भारत को वापस करने का मुतालिबा किया जा रहा है जो मलिका बर्तानिया के ताज में जड़ा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक कोह-ए-नूर समेत मुतअद्दिद कीमती अश्या ऐसी हैं, जिन्हें बर्तानिया ने औपनिवेशिक दौर में अपने जेरे तसल्लुत ममालिक (अपने नियंत्रण वाले मुल्कों) से छीना या लूटा था। मीडीया रिपोर्टस के मुताबिक अंग्रेजों ने 1799 में टीपू सुलतान के खिलाफ जंग में फतह के बाद उनके जिस्म से अँगूठी उतार ली थी जिसे एक नीलामी के दौरान 1 लाख 45 हजार पाउंडज में नामालूम शख़्स को नीलाम किया गया था। मोअर्रिखीन (इतिहासकारों) के मुताबिक 1803 में लार्ड एल्गिन ने यूनान से हार्थींन की बोसीदा दीवारों से संगमरमर निकाल कर लंदन मुंतकिल (शिफ्ट) करवा दिया था जो अब भी बर्तानवी अजाइब घर में मौजूद है। यूनान 1925 से अपनी कीमती अश्या की वापसी का मुतालिबा कर रहा है जो अब तक पूरा नहीं हो सका है। दीगर अश्या की बर्तानवी सरकार ने 1905 में अफ्रÞीका से बरामद होने वाले दुनिया के सबसे बड़े हीरे 'दी ग्रेट स्टार अफ्रÞीका' को भी लूट लिया था, जो उस वक़्त मलिका बर्तानिया के तख़्त में जड़ा हुआ है।
मीडीया रिपोर्टस के मुताबिक हीरे का वजन 530 कैरेट है जिसकी मालियत का तखमीना (अंदाजा) 40 करोड़ अमरीकी डॉलर है। तारीखदानों का ये भी कहना है कि अफ्रÞीका के अजीम सितारे नामी हीरे को ऐडवर्ड हफतुम को बतौर तोहफा पेश किया गया था हालांकि उनका ये भी दावा है कि हीरा चोरी हो गया है। मिस्री हुक्काम और माहेरीन आसारे-ए-कदीमा (पुरातत्व विशेषज्ञ) रोजीटा पत्थर को वापस मिस्र लाना चाहते हैं, लेकिन दीगर पुरानी और कीमती चीजों का मुतालिबा भी पूरा ना हो सका। 196 साल कब्ल मसीह के पत्थर से मुताल्लिक माहेरीन आसारे-ए-कदीमा का दावा है कि इस पत्थर को बर्तानवी ने सन 1800 में फ्रांस के खिलाफ जंग में फतह हासिल करने बाद चोरी किया था। वाजेह रहे कि रोजीटा पत्थर भी एल्गिन मार्बल्ज की तरह इस वक़्त बर्तानिया के अजाइब घर में मौजूद है। रिपोर्ट के मुताबिक रोजीटा पत्थर दरिया-ए-नील के एक किनारे रोजीटा के मुकाम पर 1799 में फ्रÞांसीसी फौजियों को इत्तिफाकन मिला था, जिसमें एक ही इबारत तीन जबानों यानी मिस्री तस्वीरी खत में, मिस्री अवामी खत और यूनानी खत में लिखी हुई है।
