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120 साल पुरानी है चामराज पेट ईदगाह


बर्तानवी दस्तावेजात (साल 1898) के मुताबिक ईदगाह का जिक्र नमाज पढ़ने के लिए मखसूस जगह के तौर पर है
 

बैंगलौर : आईएनएस, इंडिया 

सोश्यल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया कर्नाटक के रियासती सदर अब्दुल मजीद ने चामराज पेट ईदगाह मुआमले पर एक पे्रस कान्फें्रस से खिताब करते हुए कहा कि गणपति की मूर्ती की तंसीब (स्थापना) हुकूमत का काम नहीं है। इसके बीजेपी का फिरकावाराना एजेंडा काम कर रहा है। 

उन्होंने कहा कि चामराज पेट ईदगाह मैदान की 120 साल की तारीख है। ईदगाह का जिक्र 1898 में बर्तानवी दस्तावेजात में मुस्लमानों के लिए नमाज पढ़ने के लिए मखसूस जगह के तौर पर किया गया है जहां 1938 से ईद की नमाज अदा की जा रही है जिसके लिए काफी दस्तावेजात मौजूद हैं। रियासत में बीजेपी हुकूमत का मकसद गैर जरूरी तौर पर तनाजा (विवाद) पैदा करना और समाज में अमन को खराब करना है। 1947 में हिन्दोस्तान की आजादी के साथ ही मैदान को ईदगाह मैदान कहा जाता है और ये मुस्लमानों के कबजे में है। 

इबादतगाहों का एक्ट 1991 कहता है कि कोई भी इबादत गाहे जो 15 अगस्त 1947 से पहले जिस मजहब से मुंसलिक थीं, उसी हैसियत में रहेंगी। इस एक्ट के मुताबिक बीबीएमपी और हुकूमत दोनों का जमीन के इस टुकड़े पर कोई कंट्रोल नहीं है। उन्होंने कहा कि उनमें से किसी ने भी 1955 तक इस अराजी (जमीन) की मिल्कियत से मुताल्लिक कोई दरखास्त दायर नहीं की थी। ताहम, ये 1955 में तब शुरू हुआ, जब उस वक़्त की बैंगलौर सिटी म्यूंसिपल्टी कारपोरेशन उस जमीन पर एक स्कूल बनाना चाहती थी। उस वक़्त ईदगाह मैदान के मैनेजर ने उसकी मुखालिफत की थी क्योंकि काफी जमीन दूसरी जगह दस्तयाब थी इसके बावजूद वो मखसूस जमीन हथियाना चाहते थे। 

1956 में बैंगलौर मुंसिफ की अदालत में मुकद्दमा दायर किया गया था लेकिन अदालत ने उसे मुस्तर्द (अस्वीकार) कर दिया था। उसी साल ईदगाह मैदान के इंचार्ज काजी ने निचली अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए बंग्लूरू सिविल कोर्ट में अपील दायर की थी। अदालत ने फरीकैन को सुनने के बाद फैसला सुनाया कि 2.5 एकड़ ईदगाह मैदान की निशानदेही की गई है जो ईद के दिन मुस्लमानों की तरफ से नमाज अदा करने के लिए है और ये मुस्लमानों की है। इसके साथ ही उसने हुकूमत और सिटी म्यूनसिंपल कारपोरेशन को उसमें मुदाखिलत से रोकने का हुक्म-ए-इमतिनाई जारी किया।

1958 में, उस वक़्त की सिटी म्यूनसिंपल कारपोरेशन ने 1958 के फैसले के खिलाफ मैसूर हाईकोर्ट का रुख किया। उस वक़्त कांग्रेस पार्टी इकतिदार में थी। मैसूर हाईकोर्ट ने भी मुस्लमानों के हक में फैसला दिया और 1962 में उसे दुबारा सुप्रीमकोर्ट में चैलेंज किया गया। 27 जनवरी 1964 को अदालत-ए-उज्मा ने मुशाहिदा किया कि ये ईदगाह मैदान सदियों से मुस्लमानों की मिल्कियत है और उसे सिर्फ एक मकसद ईद की नमाज पढ़ने के लिए इस्तिमाल किया जाता है, ये कहते हुए हुकूमत की दरखास्त मुस्तर्द कर दी गई। सुप्रीमकोर्ट ने निशानदेही की थी कि सिटी म्यूनसिंपल कारपोरेशन ने मजकूरा (उक्त) ग्रांऊड की मिल्कियत और उसके इस्तिमाल से मुताल्लिक कोई दस्तावेज पेश नहीं किया। ये साबित करने के लिए दस्तावेजात मौजूद हैं कि ये जमीन 7 जून 1965 को मैसूर स्टेट बोर्ड आफ वक़्फ में वक़्फ बोर्ड की है और उसे गजट में सीरियल नंबर 137 में छापा गया है। 1979 और 1981 मेंं इमारत तामीर करने की इजाजत भी जाहिर करती है कि ये वक़्फ जायदाद है। 

एसडीपीआई रियास्ती सदर मजीद कहा कि हाल ही में रीवैन्यू मिनिस्टर ने मीडीया से बात करते हुए इन तमाम हकायक को छुपाया और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। वजीर का ये बयान कि हुकूमत की जानिब से मुतबादिल अराजी (बदले में दूसरी जमीन) दी गई है, सरासर गुमराहकुन है क्योंकि मुतबादिल जमीन नमाज के लिए नहीं बल्कि तदफीन (कब्रिस्तान) के लिए दी गई थी। गुजिशता हफ़्ते कर्नाटक की हाईकोर्ट ने एक उबूरी हुक्म जारी किया था, जिसमें उसे यथा स्थिति बरकरार रखने को कहा गया था। 

जनाब मजीद ने कहा, पूरे मुआमले में पहली मुल्जिम कांग्रेस पार्टी है जिसने मुस्लमानों को धोखा दिया और ईदगाह मैदान छीनने की कोशिश में अदालत का रुख किया। कई बार इकतिदार में आने के बावजूद इस मसले को मुस्तकिल तौर पर हल करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन्होंने कहा, कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने मुस्लमानों को यकसाँ तौर पर धोखा दिया है। 

‘यथा स्थिति’ रहेगी 

ईदगाह ग्राउंड में गणेश पूजा को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि ईदगाह ग्राउंड में गणेश पूजा नहीं की जाएगी, यहां फिलहाल जुमूद (यथा स्थिति) बरकरार रहेगा। सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को कुलअदम करार दे दिया है। हाईकोर्ट ने ईदगाह ग्राउंड में गणेश तेहवार की इजाजत दी थी, जिसे मुस्लिम फरीक ने सुप्रीमकोर्ट में चैलेंज किया था। सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि मुतनाजा ईदगाह ग्राउंड में जुमूद बरकरार रखा जाए। फिलहाल यहां गणेश तेहवार नहीं होगा। ख़्याल रहे कि ईदगाह ग्राउंड में गणेश पूजा की इजाजत देने के बाद एक और तनाजा (विवाद) खड़ा हो गया था जिसके बाद ग्राउंड के चारों तरफ पुलिस तयनात कर दी गई। रियासत के वक़्फ बोर्ड ने इस मुआमला को लेकर सुप्रीमकोर्ट से रुजू किया था। तीन जजों की बेंच इस मुआमला की समाअत कर रही थी। हाल ही में हाईकोर्ट ने रियास्ती हुकूमत से कहा था कि वो बंग्लूरू के चामराज पेट ईदगाह ग्राउंड में गणेश चतुर्थी मनाने पर गौर करे, उसके बाद रियास्ती हुकूमत ने इस ग्राउंड में गणेश तेहवार के लिए दो दिन की मंजूरी भी दी थी। उसके बाद तनाजा खड़ा हो गया था। वक़्फ बोर्ड ने इसकी मुखालिफत की और हाईकोर्ट की इस हिदायत के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट पहुंची, जहां सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया और नमाज-ए-ईदैन के साथ-साथ गणेश पूजा पर भी पाबंदी लगा दी।

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