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शिक्षा के क्षेत्र में आदिवासी समाज को नहीं मिल रहा समुचित स्थान


आदिवासी समाज ने ज्ञापन सौंपकर आत्मानंद स्कूल में प्रवेश के लिए समाज के बच्चों के लिए आरक्षण की मांग की

दुर्ग। आदिवासी गोंड़वाना समाज के नेतृत्व में गोंड़वाना महिला प्रभार अध्यक्ष ममता अरमो, एआर ध्रुव समाज प्रमुख गोंड़वाना समाज, समाज सेवी राकेश ठाकुर, पार्षद महेश्वरी ठाकुर द्वारा संभागयुक्त को ज्ञापन सौंपकर छग शासन की स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ठ विद्यालय में अनुसूचित जनजाति के बच्चों को प्रवेश में आरक्षण देने संबंधी मांग की गई। ज्ञापन में उन्होंने बताया कि शहर एवं ग्रामीण अंचल में हजारों आदिवासी परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। वर्तमान में केवल उन्हीं बच्चों को बेहतर शिक्षा सुलभ हो पा रही है, जो सक्षम हैं। छग सरकार ने लोगों की इस समस्या को महसूस कर गरीबों की मंशानुरूप प्रदेश में स्वामी आत्मानंद अंगे्रजी माध्यम उत्कृष्ठ विद्यालय की नींव डाली। छत्तीसगढ़ सरकार की यह योजना गरीब व असहाय लोगोें के जीवन में वरदान लेकर आई। लेकिन दुर्ग शहर में प्रवेश पद्धति में लाटरी एवं प्रतिशत पद्धति के आधार पर बच्चों को प्रवेश दिया गया है। दोनों पद्धति से आदिवासी वर्ग के बच्चों को सही संख्या में प्रवेश से वंचित होना पड़ा, समाज का मानना है कि शिक्षा को लाटरी रूपी भाग्य के भरोसे तौलना गलत है।

प्रतिशत पद्धति भी इस वर्ग के लिए न्यायोचित नहीं है, क्योंकि आदिवासी वर्ग सालों से शैक्षणिक रूप से पिछड़ा हुआ है। उत्कृष्ठ विद्यालय में प्रवेश से वंचित होने का अर्थ है, उत्कृष्ठ शिक्षा से वंचित होना, यह सरकार के मंशा के विरूद्ध है। विदित हो कि छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल राज्य है, सरकार का ध्यान सदैव इन वर्गो का सर्वांगीण विकास करना रहा है, विशेषकर शिक्षा को समाज के अंतिम छोर तक पहुँचाना। ज्ञापन के माध्यम से आदिवासी गोंडवाना समाज ने छग शासन शिक्षा के अधिकार स्वरूप आदिवासियों के लिए प्रवेश प़द्धति में परिवर्तन कर इन वर्गों को शिक्षा के लिए प्रवेश में आरक्षण देने की मांग की है। मांग करने वालों में समाज के प्रतिभा ठाकुर, हितेश्वरी कोर्राम, महावीर गोंड़, राजकुमार छैदैय्या सहित अन्य शामिल हैं। 


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