आजमीन-ए-हज की सहूलत के लिए नया प्रोजेक्ट ‘रोड टू मक्का’
जद्दा एयरपोर्ट से बिना जांच आजमीने हज को आगे रवाना किया जाएगा
रियाद : सऊदी अरब की तरफ से दुनिया के मुख़्तलिफ मुस्लमान ममालिक के आजमीन-ए-हज (हज यात्री) के लिए शुरू करदा 'रोड टू मक्का’ इकदाम के तहत बंगला देश से पहला काफिला गुजिशता रोज ममलकत पहुंच गया। बंगला देश के आजमीन-ए-हज्ज पर मुश्तमिल काफिला पीर को जद्दा के किंग अबदुल अजीज बैन-उल-अकवामी हवाई अड्डे पर पहुंचा।
जमहूरीया बंगला देश से ताल्लुक रखने वाले मुस्लमानों का इस प्रोजेक्ट के जरीये हुज्जाज मुकद्दस के सफर का ये पहला वाकेया है। आजमीन-ए-हज्ज का ये काफिला ढाका के हजरत शाह जलाल बैन-उल-अकवामी हवाई अड्डे से रवाना हुआ। शाह अबदुल अजीज बैन-उल-अकवामी हवाई अड्डे पर काफिले का इस्तिकबाल डायरेक्टर जनरल पासपोर्ट सर्विस और शाहराह मक्का (मक्का राजमार्ग) प्रोजेक्ट की निगरां कमेटी के चेयरमैन लेफ्टीनैंट जनरल सुलेमान इलेहया, जद्दा में बंगला देश के काउंसिल जनरल मुहम्मद जन्मुल हक और दीगर ने किया। सऊदी प्रेस एजेंसी एसपीए के मुताबिक इस साल 1443 हिजरी को जमहूरीया बंगला देश में 'रोड टू मक्का’ इकदाम का आगाज 1440 हिजरी के बाद पांच मुस्लमान ममालिक के आजमीन-ए-हज्ज के लिए किया गया है। इसमें पाकिस्तान के अलावा मलाईशीया, इंडोनेशिया और मराकश शामिल हैं। ये इकदाम जेवफ अल रहमान सर्विस प्रोग्राम के इकदामात में से एक है जो ममलकत के विजन 2030 के एहदाफ (लक्ष्य) का हिस्सा है। इस इकदाम का मकसद मेहमान ममालिक से आने वाले हुज्जाज के लिए हज के मौके़ पर बराहे रास्त नई सहूलयात मुहय्या करना है। इस सर्विस का आगाज आॅनलाइन वीजे की सहूलत से होता है। जिसके बाद आजमीने हज के कवाइफ की जानकारी, सेहत की शराइत पूरी होने के बाद मेहमान मुल्क के हवाई अड्डे से हुज्जाज की रवानगी से कबल ममलकत में उनके कयाम और नक़्ल-ए-हमल की सहूलयात तय करना है। इस तरह उन ममालिक से आने वाले आजमीन-ए-हज्ज की सऊदी अरब में मजीद जांच पड़ताल नहीं की जाएगी बल्कि उन्हें बराह-ए-रास्त बसों में बिठा कर मक्का मुअज्जमा या मदीना मुनव्वरा में उनकी मंजिल-ए-मक़्सूद तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ साथ उनके सामान को भी उनकी कियाम गाहों तक पहुंचाया जाएगा।
