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न्यूयार्क : कोई खबर या बात तेजी से फैल जाए तो उसके लिए उर्दू में एक जरब-उल-मसल (कहावत) है कि फलां बात जंगल की आग की तरह फैल गई। ये जरब-उल-मसल दरअसल जंगलात में होने वाली आतिशजदगी के तेज रफ़्तारी का पता देती है। आम तौर पर जंगलात में आग लगने के जो अस्बाब बयान किए जाते हैं उनमें से खुशक मौसम, गर्मी की शिद्दत या इन्सानी गफलत वगैरा बहुत आम हैं। इसके अलावा तेज हवा की वजह से इसके फैलाव की रफ़्तार बढ़ जाती है। माहिरीन का ख़्याल है कि जंगलात में बड़े पैमाने पर आग लगने के वाकियात में माहौलियाती अवामिल (पर्यावरणीय कारक) का किरदार बुनियादी है और ये एक आलमी मसला है।
गुजिश्ता कुछ दिनों से बलोचिस्तान में कोहे सुलेमान की पहाड़ी में शीरानी के इलाके में चिलगोजे के दरख़्तों में लगने वाली आग के बाद पाकिस्तान में भी इस मसले के अस्बाब (कारण) और तदारुक (निदान) जे़रे बेहस हैं। पाकिस्तान की वजारत बराए माहौलियाती तगय्युरात (जलवायु परिवर्तन) के मुताबिक मुल्क के कुल रकबे का पाँच फीसद से भी कम इलाके पर जंगलात फैले हुए हैं। जंगलात के रकबे में हर साल डेढ़ फीसद कमी होती है जिसकी वजह से मुल्क में हयातयाती तनव्वो (जैव विविधता) खतरे में है और इसमें मुसलसल इजाफा हो रहा है। जंगलात की कटाई और माहौलियाती तबदीलीयों के साथ जंगलात में लगने वाली आग भी जंगलात और जंगली हयात के लिए एक बड़ा चैलेंज बनती जा रही है। आम तौर पर खुशक मौसम, गर्मी की शिद्दत जैसे फित्री अस्बाब को जंगल में आग लगने की बुनियादी वजह समझा जाता है । इस के अलावा जंगल में पिकनिक के लिए आने वालों के लिए बनाए गए अलाव से बच जाने वाले अँगारे या सिगरेट आफत की चिंगारी से भड़कने वाली आग भी बड़े पैमाने पर जंगलात को अपनी लपेट में ले लेती है।
अक़्वाम-ए-मुत्तहदा के जेली इदारे फूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाईजेशन (एफएओ) चिलगोजा प्रोग्राम के को-आडीर्नेटर मुहम्मद यहया के मुताबिक बलोचिस्तान के इलाके शीरानी में आग लगने की वजह अभी तक सामने नहीं आ सकी है और इस वक़्त आग पर काबू पाया जा रहा है। ताहम माहिरीन के मुताबिक जंगल में आग की इबतिदा के अस्बाब मुख़्तलिफ हो सकते हैं लेकिन इस के लिए तीन बुनियादी अजजा लाजिम हैं। पहली चिंगारी, ईंधन और हवा यानी आॅक्सीजन। अमरीका के महिकमा जराअत की वेबसाइट पर दस्तयाब एक तहकीकी रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका में गुजश्ता दो दहाईयों के दौरान जंगलात में आग के 85 फीसद वाकियात इन्सानों की वजह से हुए हैं। उनमें जंगलात में भड़काए गए अलाव, बाकियात जलाने, आलात में होने वाली खराबी, सिगरेट बुझाने में गफलत और आतशजदगी के इरादे से आग भड़काने के वाकियात शामिल हैं। कई मर्तबा आसमानी बिजली गिरने से भी जंगलात में आग लगने के वाकियात पेश आते हैं। इस तरह भड़कने वाली आग कितनी तेजी से फैलती है, इस का इन्हिसार इस पर भी होता है कि जंगल में मौजूद पेड़ पौधों में नमी की मिकदार कितनी है। खुश्कसाली के बाइस जंगलात में अगर दरख़्त और पौधे सूख चुके हैं तो ऐसी सूरत में आग तेजी से फैलती है।