इंतिखाबी नताइज से पहले रंग बदलना शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि ऐसा लगता है कि आफिसरान का मिजाज बदलने लगा है, यानी इकतिदार की तबदीली की आहट उन्हें महसूस होने लगी होगी। अजोध्या उतर प्रदेश में असेंबली इंतिखाबात के दरमयान बहस में है। बहस की वजह रंगों की सियासत है। जिÞला मजिस्ट्रेट की आरिजी रिहायश गाह का साइनबोर्ड दुबारा तबदील कर दिया गया है। बोर्ड को 24 घंटों में दो बार तबदील किया गया है। पहले जाफरानी को सब्ज और अब सब्ज को सुर्ख़ कर दिया गया है। अयोध्या के जिÞला मजिस्ट्रेट की रिहायश गाह सितंबर 2021 से जेरे तामीर है। बर्तानवी दौर में तामीर होने वाली इस रिहायश गाह को अब नए सिरे से तामीर किया जा रहा है। उसी वजह से अयोध्या जिÞला के मौजूदा जिÞला मजिस्ट्रेट नितीश कुमार महिकमा-ए-ताअमीरात आम्मा के गेस्ट हाउस में रहते हैं और यहां उनका कैंप आॅफिस भी है। साबिक डीएम मनोज कुमार झा के दौर में जिÞला मजिस्ट्रेट की रिहायश गाह को यहां मुंतकिल किया गया था। उस वक़्त यहां एक बोर्ड लगा हुआ था। जाफरानी रंग के पस-ए-मंजर वाले इस साईड बोर्ड पर सफेद रंग में हाउसिंग डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट अयोध्या लिखा हुआ था, जिसे बुध की सुबह यानी 2 फरवरी की सुबह अचानक तबदील कर के सब्ज कर दिया गया। अब 24 घंटे के अंदर एक-बार फिर वही साइनबोर्ड तबदील कर के सब्ज पस-ए-मंजर की जगह सुर्ख़ बोर्ड लगा दिया गया है। चुनांचे एक-बार फिर हलचल तेज है और बेहस-ओ-मुबाहिसा का माहौल है। जिÞला मजिस्ट्रेट की रिहायश गाह के बोर्ड का रंग बदलने से ज्यादा उस की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं।