10 शाअबानुल मोअज्जम 1444 हिजरी
3 मार्च 2023
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नई दिल्ली : आईएनएस, इंडिया
केंद्र सरकार ने जुमेरात 9 फरवरी को बताया कि पिछले 12 सालों में 16 लाख से ज्यादा लोगों ने हिन्दोस्तान की नागरिकता छोड़कर दूसरे मुल्क की नागरिकता ली है। उनमें से पिछले साल यानी 2022 में सबसे ज्यादा 2 लाख 25 हजार 620 लोगों ने नागरिकता छोड़ी है। 2020 में 85 हजार 256 लोगों ने नागरिकता छोड़ी है। विदेश मंत्री एसजे शंकर ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2015 में 1 लाख 31 हजार 489 लोगों ने हिन्दोस्तान की नागरिकता छोड़ी थी। साल 2016 में 1 लाख 41 हजार 603 और 2017 में 1 लाख 33 हजार 49 अफराद ने हिन्दोस्तान की नागरिकता छोड़ी। जय शंकर के मुताबिक साल 2018 में 1 लाख 34 हजार 561, 2019 में 1 लाख 44 हजार 17, 2020 में 85 हजार 256 और 2021 में 1 लाख 63 हजार 370 लोगों ने नागरिकता छोड़ी।
पीटीआई के मुताबिक एसजे शंकर ने सदन में बताया कि हवाला के तौर पर उन्होंने डाक्टर मनमोहन सिंह के दौर-ए-इक्तदार के दौरान आंकड़े भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि 2011 में 1 लाख 22 हजार 819, 2012 में 1 लाख 20 हजार 923, 2013 में 1 लाख 31 हजार 405 और 2014 में 1 लाख 29 हजार 328 लोगों ने नागरिकता छोड़ी। साल 2011 से अब तक के आंकड़ों के मुताबिक 16 लाख 63 हजार 440 लोगों ने नागरिकता छोड़ी है। जय शंकर ने पार्लियामेंट में 135 मुल्कों की फहरिस्त भी दी, जहां की लोगों ने नागरिकता ली है। उन्होंने ये भी बताया कि गुजश्ता तीन सालों में पांच लोगों ने मुत्तहदा अरब अमीरात की भी नागरिकता हासिल की है।
3 मार्च 2023
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विदेश मंत्री ने किया खुलासा
नई दिल्ली : आईएनएस, इंडिया
केंद्र सरकार ने जुमेरात 9 फरवरी को बताया कि पिछले 12 सालों में 16 लाख से ज्यादा लोगों ने हिन्दोस्तान की नागरिकता छोड़कर दूसरे मुल्क की नागरिकता ली है। उनमें से पिछले साल यानी 2022 में सबसे ज्यादा 2 लाख 25 हजार 620 लोगों ने नागरिकता छोड़ी है। 2020 में 85 हजार 256 लोगों ने नागरिकता छोड़ी है। विदेश मंत्री एसजे शंकर ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2015 में 1 लाख 31 हजार 489 लोगों ने हिन्दोस्तान की नागरिकता छोड़ी थी। साल 2016 में 1 लाख 41 हजार 603 और 2017 में 1 लाख 33 हजार 49 अफराद ने हिन्दोस्तान की नागरिकता छोड़ी। जय शंकर के मुताबिक साल 2018 में 1 लाख 34 हजार 561, 2019 में 1 लाख 44 हजार 17, 2020 में 85 हजार 256 और 2021 में 1 लाख 63 हजार 370 लोगों ने नागरिकता छोड़ी।
पीटीआई के मुताबिक एसजे शंकर ने सदन में बताया कि हवाला के तौर पर उन्होंने डाक्टर मनमोहन सिंह के दौर-ए-इक्तदार के दौरान आंकड़े भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि 2011 में 1 लाख 22 हजार 819, 2012 में 1 लाख 20 हजार 923, 2013 में 1 लाख 31 हजार 405 और 2014 में 1 लाख 29 हजार 328 लोगों ने नागरिकता छोड़ी। साल 2011 से अब तक के आंकड़ों के मुताबिक 16 लाख 63 हजार 440 लोगों ने नागरिकता छोड़ी है। जय शंकर ने पार्लियामेंट में 135 मुल्कों की फहरिस्त भी दी, जहां की लोगों ने नागरिकता ली है। उन्होंने ये भी बताया कि गुजश्ता तीन सालों में पांच लोगों ने मुत्तहदा अरब अमीरात की भी नागरिकता हासिल की है।
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