नई दिल्ली : आईएनएस, इंडिया
वजीरे आजम नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में सैलाब से होनी वाली तबाही पर अफसोस का इजहार किया है। पीर को अपनी एक ट्वीट में उनका कहना था कि पाकिस्तान में सैलाब से होने वाली तबाही देखकर दुख हुआ। हम इस कुदरती आफत में जान से जाने वालों, जख्मियों और मुतास्सिरा अफराद के खानदानों से दिली ताजियत का इजहार करते हैं और उम्मीद करते हैं कि हालात जल्द मामूल पर आ जाएंगे।
कुदरती आफात के नतीजे में पैदा होने वाले हालात से निमटने के जिÞम्मेदार इदारे नेशनल डीजास्टर मैनेजमेंट अथार्टी (एनडीएमए) के मुताबिक मुल्क में मानसून सीजन के दौरान होने वाली गैरमामूली बारिशों और सैलाब के नतीजे में ढाई माह में 1136 अफराद जान से हाथ धो चुके हैं। अहम बात ये है कि इस सूरत-ए-हाल से निमटने के लिए वफाकी वजारत गिजाई तहफ़्फुज (फेडरल मिनिस्ट्री आफ फूड सेफ्टी) ने हुकूमत को फौरी तौर पर इंडिया समेत हमसाया ममालिक (पड़ोसी मुल्कों) से सब्जियां दरआमद करने की तजवीज दी है जबकि अगले साल के लिए मुल्क में गंदुम (गेहूं) की जरूरत पूरी करने के लिए तखमीना भी लगाना शुरू कर दिया है।
हुक्काम के मुताबिक वजारत (मंत्रालय) की जानिब से तजवीज (सलाह) दी गई है कि अगर मुल्क में सब्जी के बोहरान (संकट) पर काबू पाना है तो फिर हमसाया ममालिक से सब्जियां मंगवाना पड़ेंगी। जिन हमसाया ममालिक से सब्जी मँगवाई जा सकती है उनमें हिन्दोस्तान, अफ़्गानिस्तान, ईरान और तुर्की शामिल हैं लेकिन हिन्दोस्तान सबसे मौजूं रहेगा, जहां से ट्रांसपोर्ट का खर्चा कम होगा और दरआमदी बिल भी कम होगा। इस हवाले से वफाकी वजीर-ए-खजाना मिफ़्ताह इस्माईल अपनी प्रेस कान्फे्रंस में इशारा दे चुके हैं कि अवाम की जरूरत पूरी करने के लिए अगर हिन्दोस्तान से सब्जियां मंगवाना पढ़ें तो भी मंगवा लेंगे। ख़्याल रहे कि पाकिस्तान की साबिक हुकूमत ने हिन्दोस्तान की जानिब से कश्मीर की खुसूसी हैसियत को खत्म करके 5 अगस्त 2019 के इकदाम के बाद हिन्दोस्तान से तिजारत के खातमे का ऐलान कर दिया था। बादअजां इस फैसले में तरमीम (रद्दो बदल) करते हुए अदवियात (दवाईयों) में इस्तिमाल होने वाला खाम माल दरआमद करने की इजाजत दे दी गई थी।
