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मुस्लमानों के तादाद अजदवाज और हलाला मामले की अब सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच

9 दरखास्तों पर नोटिस जारी 
दो बार तलाक का शिकार तीन बच्चों की मां की मांग, मुस्लिम पर्सनल ला (शरीयत एप्लीकेशन एक्ट 1937 के सेक्शन 2) को आईन आर्टीकल ला 14, 15, 21 और 25 की खिलाफवरजी करार दिया 
इससे कब्ल बीजेपी लीडर कर चुके हैं, बहुविवाह और निकाह हलाला पर मुकम्मल पाबंदी के लिए दरखास्त दायर 
बुलंदशहर की 27 साला एक खातून भी कर चुकी हैं ताद्दद-ए-अजवाज और हलाला को गैर आईनी करार देने का मुतालिबा 
इससे कब्ल भी ताद्दद-ए-अजवाज और हलाला के खिलाफ कई दरखास्तें दायर की जा चुकी हैं 
अब मुआमले की समाअत सुप्रीमकोर्ट के आईनी बेंच करेगी


नई दिल्ली : आईएनएस, इंडिया 

तीन तलाक के बाद अब सुप्रीमकोर्ट मुस्लमानों में ताद्दद-ए-अजवाज (बहुविवाह) और हलाला की जांच करेगा। दरहकीकत ताद्दद-ए-अजवाज और निकाह हलाला के खिलाफ दरखास्तों पर सुप्रीमकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए मर्कज, एनसीडब्लयू, कौमी कमीशन बराए अकल्लीयत और एनएचआरसी से जवाबतलब किया है। 

पांच जजों की बेंच दशहरा के बाद इस मुआमले की समाअत (सुनवाई) करेगी। 9 दरखास्तों पर नोटिस जारी हुई है। अर्जगुजार और तीन बच्चों की मां समीना बेगम दो बार तीन तलाक का शिकार हो चुकी हैं। दरखास्त में कहा गया है कि मुस्लिम पर्सनल ला (शरीयत एप्लीकेशन एक्ट 1937 के सेक्शन 2 को आईन आर्टीकल ला 14, 15, 21 और 25 की खिलाफवरजी करार दिया जाए क्योंकि ये ताद्दद-ए-अजवाज और निकाह हलाला को तस्लीम करता है। यही नहीं, ताजीरात-ए-हिंद 1860 की दफआत तमाम हिन्दुस्तानी शहरीयों पर यकसां तौर पर लागू होनी चाहिए। दरखास्त में ये भी कहा गया है कि तीन तलाक आईपीसी की दफा 498 ए के तहत एक जुल्म है। 

आईपीसी की दफा 375 के तहत निकाह हलाला इस्मतदरी है और ताद्दद-ए-अजवाज आईपीसी की दफा 494 के तहत जुर्म है। साथ ही दरखास्त में कहा गया है कि कुरआन में ताद्दद-ए-अजवाज की इजाजत दी गई है ताकि उन खवातीन और बच्चों की हालत बेहतर हो जो उस वक़्त मुसलसल जंग के बाद बच गई थीं और उनका कोई सहारा नहीं था, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि इसकी वजह से आज के मुस्लमानों को एक से ज्यादा औरतों से शादी करने का लाईसेंस मिल गया है। दरखास्त में इन बैन-उल-अकवामी कवानीन और ममालिक का भी जिÞक्र किया गया है, जहां ताद्दद-ए-अजवाज ममनू (मना) है। 

समीना ने कहा है कि तमाम पर्सनल लॉज की बुनियाद बराबरी होनी चाहिए क्योंकि आईन खवातीन के लिए बराबरी, इन्साफ और वकार की बात करता है। इससे कब्ल बीजेपी लीडर अश्वनी उपाध्याय ने भी ताद्दद-ए-अजवाज और निकाह हलाला पर मुकम्मल पाबंदी के लिए दरखास्त दायर की थी। उन्होंने कहा कि इससे खवातीन के बुनियादी हुकूक की खिलाफवरजी होती है। इस के अलावा बुलंदशहर, उतर प्रदेश के 27 साला फरजाना ने सुप्रीमकोर्ट में एक अर्जी दायर की है जिसमें ताद्दद-ए-अजवाज और हलाला को गैर आईनी करार देने का मुतालिबा किया गया है। इससे कब्ल भी ताद्दद-ए-अजवाज और हलाला के खिलाफ कई दरखास्तें दायर की जा चुकी हैं। लेहाजा अब मुआमले की समाअत सुप्रीमकोर्ट के आईनी बेंच को करनी है।


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