नई तहरीक : दुर्ग
आनंद समवशरण में युवाचार्य भगवंत ने ‘चंदन की खुशबू गहे’ विषय पर केंद्रित प्रवचन दिया। उन्होंने कहा, अच्छे गुणों को ग्रहण करने वाला साधु कहलाता है। जो गुणों को छोड़ देता है, वह असाधुता की श्रेणी में आ जाता है। गुणों को ग्रहण करते हुए गुणवान बनने की कला विश्व में सिर्फ मानव को ही सहज रुप से प्राप्त है। विश्व के शेष प्राणी इस कला से वंचित है।
युवाचार्य भगवंत ने आगे कहा, वातावरण में बुराईयों का इतना प्रदूषण बढ़ गया है, यह प्रदूषण मन और तन का है। पूरे विश्व में दो तरह के मनुष्य पाए जाते हैं। एक दोष दृष्टि वाले और दूसरा गुण दृष्टि वाले। आज दोष दृष्टि वालों की संख्या पूरे संसार में बहुत अधिक में पाई जाती है और गुण दृष्टि वालों की संख्या कम होती है। दुर्योधन की हमेशा दोष दृष्टि रही है और युधिष्ठिर की हमेशा गुण दृष्टि रही है। दोष दृष्टि वाला व्यक्ति हमेशा हर व्यक्ति में सिर्फ दोष देखता है और गुण दृष्टि वाला व्यक्ति सकारात्मक रहते हुए उनकी अच्छाइयों को ग्रहण कर, उसका आकलन कर हमेशा आगे बढ़ता रहता ह।ै
उन्होंने कहा, गुण ग्राहक बनने से हम बहुत अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। अच्छाइयों का सम्मान हमेशा करना चाहिए। हम कभी किसी के दोष को न देखें। अगर हम अच्छा देखना सीख गए तो नकारात्मकता हमारे जीवन से शीघ्र खत्म हो जाएगी। गुरु भगवंतो की सेवा करने बाहर शहर से पधारी रुकमणी देवी चौधरी मासक्षक्षमण की तपस्या की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने 29 उपवास का संकल्प लिया। इसी तरह आशीष रतन बोहरा ने पांच उपवास का संकल्प युवाचार्य श्री से लिया। साध्वी श्री सन्मति जी एवं अन्य साध्वी समुदाय द्वारा कल्प सूत्र का वाचन प्रतिदिन किया जा रहा है। 24 घंटे के नवकार महामंत्र की अराधना लगातार जारी है। हर रोज रात में हर्ष और उल्लास के वातावरण में जाप जारी है।

