एमडब्ल्यू अंसारी (आईपीएस, रिटा. डीजीपी)
अब्दुल कय्यूम अंसारी का अहम तरीन सियासी कारनामा ये है कि उन्होंने मुल्क-ओ-कौम के मुफाद में आॅल इंडिया मोमिन कान्फ्रस की तंजीम और मोमिन तहरीक के जरीया मुस्लिम लीग की मस्मूम फिकार्वाराना पालिसी के खिलाफ भारती मुस्लमानों की कुल आबादी के नसफ पर मुश्तमिल मोमिन जमात को बेदार किया।
एकम जुलाई की तारीख हर साल अजीम कौमी रहनुमा अब्दुल कय्यूम अंसारी की यौम-ए-पैदाइश के ताल्लुक से उनकी याद का दिन है। उनकी सियासी सरगर्मी बिहार तक ही महिदूद नहीं रही। वो कौमी सियासत में भी मुतवातिर सरगर्म रहे। उनके गुजर जाने से मुल्क को बड़ा सदमा पहुंचा था और एक अजीम कौमी खसारा हुआ कि इस सानिहा से जो खला पैदा हुआ, वो अब तक पुर नहीं हो सका। इसे मलहूज रखते हुए उनकी तारीख साज शख़्सियत और उनके लाजवाल कारनामों से मुताल्लिक एक जायजा लिया गया।
तकसीम से पहले के मुत्तहदा भारत और आजादी के बाद मुनकसिम भारत में करीब नस्फ सदी पर मुहीत अब्दुल कय्यूम अंसारी की सियासी सरगर्मी की वाबस्तगी भारती कौमीयत से बराबर कायम रही और इस एतबार से सबक आमोज रही और है। उन्होंने तकसीम-ए-हिंद की शदीद मुखालिफत की और कौमी सियासत में वो हुब्ब-उल-व्तनी, कौमपरवरी और सही-ओ-सालेह रहनुमाई के जो नुकूश छोड़ गए, वो हमेशा बाकी रहेंगे।
वजीर मुकर्रर किए जाने के कुछ अरसा बाद मोमिन तंजीम से सलाह-ओ-मश्वरा करके अब्दुल कय्यूम अंसारी ने सियासी तंजीम इंडियन नेशनल कांग्रेस के अह्दनामा पर दस्तखत किए। मोमोन कान्फ्रÞैंस की हैसियत एक अलाहदा सियासी तंजीम की नहीं रही बल्कि मोमिन कान्फ्रÞैंस पहले की तरह एक समाजी और इकतिसादी तंजीम बन गई। मुल्क के तबदीलशूदा हालात के मद्द-ए-नजर ये फैसला करना सही रहा।
अब्दुल कय्यूम अंसारी की रहनुमाई में आॅल इंडिया मोमिन कान्फ्रÞैंस ने महात्मा गांधी की रहनुमाई में कांग्रेस की हिमायत की। उन्हें यकीन था कि कांग्रेस एक मुत्तहदा भारत की अजादी के लिए और समाजी मुसावात, सेक्यूलारिज्म और जमहूरीयत के कियाम और उनकी नशो-ओ-नुमा के लिए जद्द-ओ-जहद कर रही है। उन्होंने बंकर जमात और दीगर दस्तकार जमातों की इकतिसादी फलाह और मुल्क की सनअत में हथकरघा सेक्टर के फरोग के लिए भी कोशिशें कीं
गैर मुनकसिम भारत के सियासी हालात का मुताला करने के लिए सर इस्टेफर्ड क्रिप्स 1939 में जवाहर लाल नहरू से इलाहाबाद में आनंद भवन में मिले और दरयाफत किया कि वो कौन मुस्लिम रहनुमा हैं, जो मुस्लिम अवाम की तजुर्मानी और मुस्लिम लीग के खिलाफ कांग्रेस की कौमी तहरीक की हिमायत करते हैं, जवाहर लाल नहरू ने क्रिप्स से जिन मुस्लिम रहनुमाओं के नामों का जिÞक्र किया, उनमें एक नाम मोमिन तहरीक के रहनुमा अब्दुल कय्यूम अंसारी का था। उन्होंने इलाहाबाद में आॅल इंडिया मोमिन कान्फ्रÞैंस की जानिब से मोमिन जमात के सियासी नजरियात और मुतालिबात के ताल्लुक से एक याददाश्त क्रिप्स की खिदमत में पेश की थी।
पाकिस्तानी हमले की मजम्मत की
वे पहले भारती मुस्लिम रहनुमा थे जिन्होंने अक्तूबर 1947 में कश्मीर पर पाकिस्तानी हमले की मुजम्मत की और पूरी ताकत से मुस्लिम अवाम को बेदार किया कि वो सच्चे भारती शहरीयों की हैसियत से हमले की मुखालिफत के लिए तैयार रहें। उन्होंने पाकिस्तानी मकबूजा कश्मीर के इलाकों को आजाद कराने के लिए 1957 में इंडियन मुस्लिम यूथ कश्मीर फ्रंट कायम किया। इससे पेशतर उन्होंने सितंबर 1948 के दौरान हैदराबाद के रजाकारों की भारत मुखालिफ बगावत के ताल्लुक से भारती मुस्लमानों से हकूमत-ए-हिन्द की हिमायत करने की ताकीद की। वो पसमांदा जमातों की तालीमी और खवांदगी की मुहिम से जुड़े रहे और उन्हीं की कोशिशों से 1953 में हकूमत-ए-हिन्द ने पहले आॅल इंडिया बैकवर्ड क्लासेज कमीशन की तशकील की।
अब्दुल कय्यूम अंसारी तकरीबन 17 बरसों तक बिहार काबीना में वजीर रहे और अहम कलमदान-ए-वजारत पर फाइज रहे और पूरी अहलीयत से अपनी जिÞम्मेदारी निभाई और बेलौस खिदमत-ओ-दियानतदारी की मिसाल कायम की। 18 जनवरी 1973 को वो अवाम की खिदमत करते हुए दुनिया से रुखस्त हुए।
हुमायूं कबीर ने अपनी किताब ''मुस्लिम पालीटिक्स 1909 से 1947 तक' में तहरीर किया है कि ''एक तरह से मोमिन अंसारी कान्फ्रÞैंस का इर्तिका बड़ी एहमीयत का हामिल हो गया है। मोमिनों की तादाद हिन्दुस्तानी मुस्लमानों की कुल आबादी में अक्सरीयत का दर्जा रखती है। ये अमर वाकई बहुत अहम है कि मोमिन जमात जो मुस्लमानों में इंतिहाई पसमांदा जमात है, कांग्रेस के अगराज-ओ-मकासिद से ना सिर्फ मुकम्मल हमदर्दी रखती है बल्कि उस की हमनवा और हलीफ भी है । '
हुकूमत बिहार से मुतालिबा है कि अब्दुल कय्यूम अंसारी के नाम से बिहार में यादगार का कियाम किया जाये, उनके नाम से स्कूल, कॉलेज खोला जाये और निसाब की किताबों में उनके कारनामों को जो उन्होंने रियासत बिहार और मुल्क भारत की तरक़्की और आपसी यकजहती के लिए अंजाम दिए हैं।
- बेनजीर अंसार एजूकेशनल एंड सोशल वेल्फेयर सोसाइटी
अहमदाबाद पैलेस रोड, भोपाल
