न्यूयार्क : मोबाइल फोन के मनफी (नेगेटिव) इस्तिमाल के हवाले से बहस हर जगह जारी रहती है मगर ये बात हैरानकुन है कि इन्सानी राबतों की दुनिया में इन्किलाब बरपा करने वाले इस आले (उपकरण) का मूजिद (आविष्कारक) भी इसके बेजा (अलुचित) इस्तेमाल से तंग आ गया है।
अमरीकी अखबार 'पोस्ट' के मुताबिक दुनिया के पहले मोबाइल फोन के मूजिद ने सारफीन (उपभोक्ताओं) की जानिब से फोन पर वक़्त जाया करने पर हैरत का इजहार किया है। उनका कहना है कि वो अपने मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल ना करें और मश्वरा दिया कि वो सादा और फोन के बगैर वाली जिंदगी से लुत्फ अंदोज हों। फोन पर वक़्त जाया करने के बजाय अपने वक़्त और जिंदगी का बेहतर इस्तिमाल करें। 92 साला मार्टिन कूपर ने जुमेरात को बीबीसी ब्रेकफास्ट के साथ एक इंटरव्यू के दौरान इस एपीसोड में शरीक एक खातून ने तबसरा करते हुए कहा कि वो अपने फोन पर दिन में पाँच घंटे से ज्यादा वक़्त गुजारती हैं। कूपर ने हंसते हुए पूछा कि क्या आप वाकई दिन में पाँच घंटे फोन पर गुजारती हैं।
सन 1973 में कूपर ने दुनिया का पहला मोबाइल फोन मोटोरोला डायना टीएसी 8000 एक्स ईजाद किया। वो बीस साल से ज्यादा अर्से से मोटोरोला के लिए काम कर रहे थे। कार फोन्ज की बढ़ती मकबूलियत से मायूस थे, जिसके लिए कुछ लोगों को फोन इस्तिमाल करने के लिए गाड़ी में बहुत ज्यादा वक़्त गुजारना पड़ता था। कूपर ने सीबीएस के जरीये नश्र (प्रसारित) किए गए एक इंटरव्यू में मजीद (आगे) कहा कि इसके बाद उन्हें एक ऐसा मोबाइल फोन बनाने का ख़्याल आया, जिसे गाड़ी के अंदर या बाहर और कहीं भी इस्तिमाल किया जा सके। दिलचस्प बात ये है कि कूपर ने बताया कि इससे पहले कि उसने मोबाइल फोन के मेकेनिक्स पर तवज्जो मर्कूज (केंद्रित) की। उसने तसव्वुर किया कि डिवाईस कैसी होगी, मैं चाहता था कि ये जेब में फिट होने के लिए इतना छोटा हो लेकिन साथ ही इसका साइज इसकी इजाजत दे कि आप सुनने के लिए उसे कान में लगाएं और मुँह से बोलें ताकि दूसरी तरफ मौजूद शख़्स सुन सके।
कूपर फख्र करता है कि इसकी सबसे बड़ी कामयाबी ये है कि हर एक का अपना फोन नंबर है, उस वक़्त तक फोन नंबर घर, कार या दफ़्तर जैसी जगहों से मुंसलिक थे। मोटोरोला ने बाद में कूपर के प्रोजेक्ट में करोड़ों की रकम डाली जिसके बाद कूपर और उसकी टीम को फोन बनाने में सिर्फ तीन माह लगे। क्योंकि उन्होंने इसी तरह की टैक्नोलोजी का इस्तिमाल किया, जिस तरह पुलिस के मुवासलाती आलात (संचार उपकरण) पहले बनाए गए थे।
10 घंटे में होती थी बैटरी चार्ज
मुकम्मल होने के बाद, डिवाईस का नाम मोटोरोला रखा गया। उस का वजन 910 ग्राम और लंबाई 25 सेंटीमीटर थी जबकि बैट्री सिर्फ 25 मिनट तक चलती थी। उसे रीचार्ज होने में 10 घंटे लगते थे। 3 अप्रैल 1973 को कूपर ने मोबाइल डिवाईस का इस्तिमाल करते हुए अपनी पहली बार फोन काल की। उन्होंने ये काल अपने हरीफ (प्रतिद्वंदी) जोयल अंजुल को जो बतौर प्रिंसिपल इंजीनियर काम कर रहे थे। उसके बाद कूपर के मोबाइल फोन से काल उस वक़्त की गई, जब वो मिड टाउन मैनहटन में सहाफियों (पत्रकारों) के हुजूम के सामने खड़े थे, जबकि अंजुल ने लैंडलाइन पर काल रिसीव की। अगरचे पहला मोबाइल फोन 90 दिन से ज्यादा की मुद्दत में तैयार किया गया था लेकिन उसे मार्कीट में लाने में दस साल का अरसा लगा। मोबाइल फोन पहली बार मंजरे आम पर लोगों के लिए दस्तयाब हुआ तो उस वक़्त एक फोन सेट की कीमत 1983 में 3,995 डालर थी।
2, 028 अमरीकियों के 2021 के सर्वे से पता चला है कि 46 फीसद सारिफीन (उपभोक्ता) अपने फोन पर दिन में पाँच से छ: घंटे गुजारते हैं जब कि 11 फीसद ने अपने मोबाइल आलात पर सात या इससे ज्यादा घंटे गुजारने की बात कही।
तलाक की बड़ी वजह ‘सोशल मीडिया’
कुवैत सिटी : कुवैत यूनीवर्सिटी के मातहत खलीज और जजीरा अरब मुतालआत मर्कज ने मुल्क में तलाक की सबसे बड़ी वजह की निशानदेही की है। कुवैती जरीदे अलराए के मुताबिक मुतालआती मर्कज ने हाल ही में तलाक के मुआमले पर कुवैत में राय आम्मा (आम लोगों के विचार) का जायजा तैयार किया था। जिसमें शामिल पंद्रह फीसद अफराद ने इस यकीन का इजहार किया कि कुवैत में तलाक की सबसे बड़ी वजह सोशल मीडीया है।
तलाक के बड़े सबब
13 फीसद ने कहा कि मजहबी शऊर की कमी इसका बड़ा सबब है।
9.8 फीसद ने कहा मियां-बीवी के रिश्तेदारों की मुदाखिलत
9.2 फीसद बेजा आजादी
9.0 फीसद ने कहा खानदान की लापरवाही और जिम्मेदारी अदा ना करने की वजह
8.6 फीसद का ख़्याल है कि माली मसाइल भी इसकी बड़ी वजह हैं।
7.7 फीसद का कहना है कि मियां-बीवी के दरमयान एतबार का फुकदान (कमी) और (वैवाहिक जीवन) में खयानत
5.9 फीसद का दावा है कि नए जोड़े को आरामदेह रिहायश नहीं मिल रही
5.6 फीसद का कहना है कि शौहर, बीवी और बच्चों पर खर्च नहीं करते इसलिए तलाकें होती हैं।
5.6 फीसद का ख़्याल है कि शौहर और बीवी के दरमयान तशद्दुद (तनाव) बढ़ रहा है।
5.3 फीसद का मानना है कि तलाक की वजह जिन्सी (शारीरिक) मसाइल हैं।
