इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर के जेर-ए-एहतिमाम एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल लैक्चर
नई दिल्ली : इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर की तरफ से हर साल एपीजे अब्दुल कलाम की याद में एक खुत्बे का इनइकाद किया जाता है। इस साल यह प्रोग्राम राष्ट्रपति भवन में मुनाकिद किया गया जिसे सदर रामनाथ कोविंद ने खिताब किया।
सदर रामनाथ कोविंद के खिताब से कब्ल इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर के बोर्ड आफ ट्रस्टी और बीजेपी तर्जुमान यासर जीलानी की कियादत में इस्लामिक कल्चरल सेंटर के कारकुनान ने सदर जमहूरीया से मुलाकात कर उन्हें आईआईसीसी की एजाजी मेंबरशिप सौंपी। यासर जीलानी ने कहा कि ये पल इस्लामिक कल्चरल सेंटर के लिए तारीखी है कि पहली बार हमारा प्रोग्राम सदर ऐवान में हो रहा है और मेहमान-ए-खोसूसी हिन्दोस्तान के सदर राम नाथ कोविंद हैं। एपीजे अब्दुल कलाम हिन्दोस्तान की गंगा जमुनी तहजीब की अलामत हैं।
सदर जमहूरीया रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैं अपनी खुशकिसमती समझता हूँ कि कलाम साहिब जैसी अजीम शख़्सियत की याद में मुनाकिद इस जलसे में शिरकत करने का मौका मिला। इस लैक्चर सीरीज के जरीया कलाम साहिब के आदर्शों को लोगों तक पहुंचाने के लिए मैं इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर के सदर और गवर्निंग काउंसिल को मुबारकबाद देता हूँ। मुझे ये जानकर बेहद खुशी हुई है कि ये सेंटर अपने मैंडियट के मुताबिक कौमी इत्तिहाद के लिए लगातार काम कर रहा है। नेशनल एंटी ग्रेशन के लिए काम करके आप सब सही माअनों में कलाम साहिब जैसे नेशनल लीडर की विरासत को मजबूत बना रहे हैं। इस नेक काम के लिए आप सबकी जितनी भी तारीफ की जाये कम है। आजकल हम भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने का 'अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं। इस महोत्सव का एक पहलू मुजाहिदीन आजादी और आजादी के बाद भारत के सफर को याद करना भी है, मैं चाहूँगा कि इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर कलाम साहिब के बारे में नई नसल में मजीद मालूमात-ओ-बेदारी पैदा करे।

