नई खोज, वायरस से बनने वाली ‘दिमागी धुंध’ को खत्म करने में मिल सकती है मदद
न्यूयार्क : अमरीका में होने वाली एक नई तहकीक (शोध) से पता चला है कि कोरोना वायरस के इन्फेक्शन से पैदा होने वाला मदाफअती रद्दे अमल (रोग प्रतिरोधक) दिमाग की खून की नालियों को नुक़्सान पहुँचाता है और तवील (लंबे) अर्से तक कोविड 19 मर्ज की अलामात का बाइस (कारण) हो सकता है।
यूएस नेशनल इंस्टीटियूट आफ हैल्थ के साईंसदानों की मंगल को शाइआ होने वाली एक महदूद पैमाने पर की गई तहकीक इन नौ अफराद (लोगों) के दिमागी पोस्टमार्टम पर मबनी (आधारित) थी जो वाइरस का शिकार होने के बाद अचानक इंतिकाल कर गए थे।
जर्नल ब्रेन में शाइआ होने वाले मकाले (सामग्री) के मुताबिक, दिमाग में कोविड का पता लगाने की बजाय टीम ने देखा कि ये लोगों की अपनी एन्टी बॉडीज थीं, जिन्होंने दिमाग की खून की नालीयों पर हमला किया, जिसके नतीजे में नुक़्सान हुआ। ये तहकीक इस बात की वजाहत (स्पष्ट) कर सकती है कि कुछ लोगों में इन्फेंक्शन के असरात (प्रभाव) देरपा (लंबे समय तक) होते हैं। इन असरात में सर दर्द, थकावट, जायका और बू की कमी, और नींद ना आने के साथ साथ दिमागी धुंध भी शामिल है। ये तहकीक तवील अर्से तक जारी रहने वाले कोविड मर्ज के लिए नए ईलाज में भी मददगार हो सकती है। नेशनल इंस्टीटियूट आफ हैल्थ के साईंसदान अवेंद्रा नाथ, जो मकाले के सीनीयर मुसन्निफ (लेखक) हैं, ने एक बयान में कहा कि कोविड के साथ मरीज अक्सर आसाबी पेचीदगीयों (तांत्रिक संबंधी जटिलताएं) से दो-चार होते हैं। ताहम बुनियादी पैथो फीजियोलाजिकल यानी मर्ज के हवाले से किसी शख़्स के निजाम के काम करने के अमल को अच्छी तरह से समझा नहीं गया है। उनके बाकौल (उनके अनुसार), हमने पहले पोस्टमार्टम में मरीजों के दिमागों में खून की नालीयों को पहुंचने वाले नुक़्सान और सोजिश को दिखाया था, लेकिन हमें नुक़्सान की वजह समझ में नहीं आई। मेरे ख़्याल में इस मकाले में हमने वाकियात के रुनुमा होने में अहम बसीरत (महत्वपूर्ण अंतरदृष्टि) हासिल की है।
तहकीक में ऐसे नौ अफराद को शामिल किया गया था, जिनकी उम्र 24 से 73 साल थीं और जिनमें इससे कबल की गई तहकीक के मुताबिक स्कीन के जरीये दिमाग में खून की शरयानों (धमनियों) के नुक़्सान होने का पता चला था। तहकीक में हिस्सा लेने वाले अफराद के दिमागों का मुवाजना (तुलना) 10 कंट्रोलशुदा अफराद से किया गया। साईंसदानों ने दरयाफत किया कि कोविड 19 के खिलाफ पैदा होने वाली एन्टी बॉडीज ने गलती से ऐसे खलीयों को निशाना बनाया जो दिमाग में खून में रुकावट बनते हैं। ये रुकावट एक ढांचा है जो नुक़्सानदेह हमला आवरों को दिमाग से बाहर रखने का काम करता है जबकि जरूरी मादों को गुजरने की इजाजत देता है। इन खलीयों को पहुंचने वाला नुक़्सान प्रोटीन के इखराज, खून बहने और जमने का सबब बन सकता है, जिससे दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। खून का बहाव मेकरोफेजज नामी मदाफअती खलीयों को भी मुतहर्रिक (अलग) करता है जो नुक़्सानजदा (प्रभावित) हिस्से को बहाल करने के लिए इस हिस्से पर पहुंचते हैं और इस अमल से सोजिश होती है। इस तहकीक से उखज किए गए (लिए गए) नताइज तवील मुद्दती आसाबी अलामात जाहिर करने वाले मरीजों में हयातयाती (जैविक) अमल के बारे में सुराग फराहम करते हैं। इन नताइज से नए ईलाज से आगाही हासिल होती है, जैसा कि एक ऐसी दवा, जो दिमाग में खून में रुकावट पर एन्टी बॉडीज के जमा होने को निशाना बनाती हो।
