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पैगंबर-ए-इस्लाम की साहबजादी पर फिल्म, सख़्त एहतिजाज के बाद रोकनी पड़ी नुमाइश


लंदन : आईएनएस, इंडिया
 

मुस्लिम बिरादरी का कहना है कि हजरत फातिमा रदिअल्लाहो अन्हो पर फिल्म 'दी लेडी आफ हेवन’ फिरकावाराना नजरिए पर मबनी है और फितरतन मुस्लिम कम्यूनिटी के लिए तौहीन आमेज है। मुस्लमानों के एहतिजाज के बाद बर्तानवी सिनेमाघरों ने नुमाइश ना करने का फैसला किया है। 

बर्तानिया में सिनेमाघरों की सबसे बड़ी चेन 'सेन वर्ल्ड’ ने पैगंबर-ए-इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की साहबजादी हजरत फातिमा रदि अल्लाहो अन्हो के बारे में फिल्म 'दी लेडी आफ हेवन' की नुमाइश को मंसूख करने का फैसला किया है। मुस्लमानों की मारूफ तंजीम मुस्लिम काउंसिल ने इस फिल्म को तौहीन आमेज करार दिया था और नुमाइश से कब्ल मुस्लिम तन्जीमों ने बाअज सिनेमाघरों के बाहर एहितजाजी मुजाहिरे किए थे। सेन वर्ल्ड दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सिनेमा चेन है, जिसने ऐलान किया है कि हिफाजती खदशात के सबब बर्तानिया में 'दी लेडी आफ दी हेवन' की नुमाइश को हर जगह मंसूख कर दिया गया है। 'सेन वर्ल्ड के एक तर्जुमान का कहना था कि फिल्म की नुमाइश से मुताल्लिक, बाअज हालिया वाकियात की वजह से, हमने अपने अमले और सारिफीन की हिफाजत को यकीनी बनाने के लिए फिल्म की आइन्दा होने वाली तमाम नुमाइशों को मुल्क भर में मंसूख करने का फैसला किया है। इस फैसले से कब्ल बर्तानिया के मुतअद्दिद शहरों में फिल्म की स्क्रीनिंग के खिलाफ एहितजाजी मुजाहिरे हुए। इस हवाले से एक आॅनलाइन वीडीयो में देखा जा सकता है कि शुमाली इंगलैंड में शेफील्ड सेन वर्ल्ड के मैनेजर मुजाहिरीन के एक ग्रुप को बता रहे हैं कि फिल्म की स्क्रीनिंग मंसूख कर दी गई है। इसी तरह के एक और मुजाहिरे में मर्कजी शहर बर्मिंघम और शुमाली कस्बे बोल्टन में सेन वर्ल्ड थिएटर्स को निशाना बनाया गया। 

‘लेडी आफ दी हेवन’ एक ऐसी पहली तारीखी ड्रामा फिल्म है, जो पैगंबर-ए-इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की साहबजादी हजरत फातिमा रदि अल्लाहो अन्हो की जिंदगी पर मबनी है। फिल्म में इस सदी की बदनाम दहश्तगर्द तंजीम  इस्लामी स्टेट और सिटी मकतब फिक्र के इस्लाम की बाअज अहम तारीखी शख्सियात के दरमयान मुवाजना करने की कोशिश की गई है। इसकी वेबसाइट पर फिल्म का खुलासा कुछ यूं लिखा है, 'पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की साहबजादी हजरत फातिमा रदि अल्लाहो अन्हो का दिल दहला देने वाला सफर... फिल्म का आगाज इराक पर दाइश के हमले से होता है और पहले ही सीन में एक भयानक कत्ल का मंजर है। चूँकि मजहब इस्लाम में मजहबी शख्सियात की बराह-ए-रास्त तस्वीरकशी मना है, इसलिए हजरत फातिमा रदि अल्लाहो अन्हो को एक ऐसे बे-चेहरा किरदार के तौर पर पेश किया गया, जो सिर्फ एक स्याह निकाब ओढ़े हुए हैं। इस फिल्म का एक ट्रेलर दिसंबर 2020 में पोस्ट किया गया था, जिसे यूट्यूब पर तीस लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है, लेकिन इस पर तबसरा करने की इजाजत नहीं है। बर्तानिया में ताहम मुस्लिम तंजीमें इस फिल्म की सख़्त मुखालिफ हैं। एक लाख बीस हजार से ज्यादा लोगों ने एक आॅनलाइन पिटीशन पर दस्तखत किए हैं, जिसमें फिल्म को नसल परस्ती पर मबनी करार दिया गया है और उसे बर्तानिया के तमाम सिनेमाघरों से हटाने का मुतालिबा किया गया है। बर्तानिया में मसाजिद से मुताल्लिक 'बोल्टन काउंसिल ने इस हवाले से अपने एक मकतूब में लिखा है कि ये एक फिरकावाराना नजरिए पर मबनी फिल्म है और मुस्लिम कम्यूनिटी के लिए फितरतन तौहीन आमेज है। इसके मुताबिक ये फिल्म बहुत एतबार से पैगंबर इस्लाम की शदीद तौहीन करती है और हर मुस्लमान के लिए सख़्त परेशानी का बाइस है। ताहम 'दी लेडी हेवन' के एगजीक्यूटिव प्रोडयूसर का कहना है कि तनाजे की वजह से फिल्म की तशहीर होने के साथ ही ये ज्यादा से ज्यादा नाजरीन तक पहुंच रही है। उन्होंने फिल्म की नुमाइश ना करने के फैसले पर नुक्ता-चीनी की और उसे आजादी इजहार पर पाबंदी से ताबीर किया।


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