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समस्जिद नबवी में नारेबाजी, 3 साल कैद और जुर्माना


रियाद :
सऊदी अरब ने मस्जिद नबवी में नारेबाजी करने के इल्जाम में पाकिस्तानी शहरी को 3 साल कैद की सजा सुना दी। 

बर्तानवी मीडीया के मुताबिक सऊदी अरब की अदालत ने मदीना मुनव्वरा में मस्जिद नबवी में नारेबाजी पर एक पाकिस्तानी शहरी को तीन साल कैद और 10 हजार रियाल जुर्माने की सजा सुनाई। सऊदी अदालत से सजा पाने वाले मुहम्मद ताहिर पर इल्जाम था कि उन्होंने मस्जिद नबवी में पाकिस्तानी वफद से बदतमीजी के नारे लगाए और अफरातफरी की वीडीयो टिकटॉक पर अपलोड की जो वाइरल हो गई। ताहिर 30 रोज के अंदर फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं। रवां साल अप्रैल में मस्जिद नबवी में नारेबाजी का वाकिया उस वक़्त पेश आया जब वजीर-ए-आजम शहबाज शरीफ और अपने वफद के हमराह सऊदी अरब का दौरा कर रहे थे।


अफ़्गानिस्तान : तौहीन मजहब के इल्जाम में मारूफ फैशन मॉडल गिरफ़्तार

काबुल : अफ़्गान तालिबान हुकमरानों ने मुल्क के एक मारूफ फैशन मॉडल अजमल हक़्की और उनके तीन साथियों को गिरफ़्तार कर लिया है। तीनों पर मजहब इस्लाम और मुस्लमानों की मुकद्दस किताब कुरआन-ए-मजीद की आयात की तौहीन का इल्जाम आइद किया गया है। अफ़्गानिस्तान में तालिबान के कंट्रोल वाली खुफ़ीया एजेंसी ने दो रोज कब्ल टवीटर पर एक वीडीयो पोस्ट की, जिसमें मारूफ अफ़्गान मॉडल अजमल हक़्की हथकड़ियों में जकड़े नजर आए। अजमल मुल्क में अपने फैशन शोज, यूट्यूब क्लिप्स और मॉडलिंग ईवंटेस की वजह से काफी मारूफ हैं। सोशल मीडीया में बड़े पैमाने पर गर्दिश करने वाली एक और मुतनाजा वीडीयो में अजमल को अपने एक साथी गुलाम सखी के साथ हंसते हुए दिखाया गया है, जबकि वीडीयो में गुलाम सखी अरबी में कुरानी आयात की मजाहीया अंदाज में तिलावत कर रहे हैं। उनकी गिरफ़्तारी इसी मुतनाजा वीडीयो के बाद अमल में आई। तालिबान ने इन गिरफ़्तारियों के बाद हक़्की और उनके साथियों की एक वीडीयो भी जारी की, जिसमें वो हल्के भूरे रंग के जेल के लिबास में खड़े हैं और तालिबान हुकूमत और मजहबी उलमा से माफी मांग रहे हैं। इस वीडीयो के साथ ही एक पैगाम भी पोस्ट किया गया, जिसमें कहा गया है कि किसी को भी कुरानी आयात या पैगंबर इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के अक़्वाल की तौहीन करने की इजाजत नहीं है। ये वाकिया मंगल के दिन का है और फिर बुध के रोज इन्सानी हुकूक की आलमी तंजीम एमन्सिटी इंटरनेशनल ने एक बयान जारी किया, जिसमें तालिबान पर जोर दिया गया कि वो हक़्की और उनके साथियों को फौरी और गैर मशरूत तरीके से रिहा कर दें। जुनूबी एशिया में एमनेस्टी की मुहिम चलाने वाली समीरा हमीदी ने इन गिरफ़्तारीयों की मुजम्मत करते हुए कहा कि अजमल हक़्की और उनके साथीयों को हिरासत में लेकर और उन्हें माफी मांगने पर मजबूर कर के तालिबान ने आजादी इजहार के हक पर एक खुला हमला किया है। इस बयान में तालिबान की जानिब से ऐसे लोगों पर मुसलसल सेंसरशिप की भी मुजम्मत की गई जो आजादाना तौर पर अपने ख़्यालात का इजहार करना हैं।


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