बरसी पर खिराज-ए-अकीदत पेश की
तालीम व तरक्की के लिए की ना काबिल-ए-फरामोश खिदमात
-एमडब्ल्यू अंसारी, (आईपीएस), (रिटा. डीजीपी)
अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी की पहली खातून चांसलर और रियासत भोपाल की आखिरी खातून फरमांरवां आँ जहानी (स्वर्गीय) नवाब सुलतान बेगम 16 जून 1901 से 20 अप्रैल 1926 तक रियासत भोपाल की हुक्मरां रहीं। इस दौरान उन्होंने रियासत की हमा-जिहत तरक़्की (व्यापक विकास) के साथ-साथ तालीम के मैदान में जो खिदमात अंजाम दिए, उन्हें कभी फरामोश नहीं किया जा सकता है। हालांकि आज अवाम उनकी खिदमात को भूल गई है।
आँ जहानी नवाब दोस्त मुहम्मद खां से लेकर नवाब हमीदुल्लाह खान जैसे कई ऐसे नवाब हुए, जिन्होंने कौम की हमा-जिहत तरक़्की के लिए अपनी गिरां कदर खिदमात अंजाम दी, लेकिन अवाम उनकी खिदमात से बे-खबर हैं।
इस सिलसिले में भोपाल के कोहे फिजा में मरहूमा नवाब सुलतान जहां बेगम की बरसी के मौका पर खराज-ए-अकीदत पेश करने की गरज से एक प्रोग्राम का इनइकाद किया गया। इस दौरान मजकूरा नवाब भोपाल को सोफिया मस्जिद के अहाता में उनके मकबरा पर पहुंच कर फातिहा पढ़ी गई और उनके लिए दुआ-ए-मग़्फिरत की गई।
इसके साथ ही लोगों से अपील की गई कि भोपाल के नवाबों की खिदमात को आने वाली नसलों और अवाम तक पहुंचाने के लिए उनके नाम से तकरीबात का इनइकाद किया जाए और उन बेमिसाल हस्तियों को याद किया जाए।
बेनजीर अंसार एजूकेशनल एंड सोशल वेल्फेयर सोसाइटी
अहमदाबाद पैलेस रोड, भोपाल

