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मंकी पोकस का खौफ, तमिलनाडू में हाई अलर्ट


चेन्नई :
तमिलनाडू हुकूमत ने जर्मनी, अमरीका, बर्तानिया, फ्रÞांस और आस्ट्रेलिया वगैरा ममालिक में मंकी पाक्स बीमारी की इत्तिला मिलने के बाद तमाम जिला कलक्टरों और तिब्बी आफिसरान को हाई अलर्ट पर रखा है। तमिलनाडू के हेल्थ सेक्रेटरी जे राधा कृष्णन ने तमाम जिÞला कलक्टरों को एक सर्कुलर भेजा है कि वो इस बीमारी के बारे में अलर्ट रहें और उन लोगों की सख़्त स्क्रीनिंग करें। जिन्होंने इन ममालिक का सफर किया है, जहां तिब्बी आफिसरान के साथ मंकी पाक्स के मुआमलात रिपोर्ट हो रहे हैं। रियासत के ेहेल्थ सेक्रेटरी ने अपने सर्कुलर में कलेक्टरों और जिÞला तिब्बी अफिसरों को भी हिदायत दी है कि वो अलर्ट रहें। रियास्ती सेहत के सेक्रेटरी ने मेडीकल आफिसरान को भी हिदायत की है कि वो तमाम मुश्तबा केसों की सेहत मराकज में रिपोर्ट करें। 

मुत्तहदा अरब इमारात में पहले केस की तसदीक

दुबई : मुत्तहदा अरब अमीरात की वजारत-ए-सेहत ने मंगल के रोज मुल्क में 'आबला बंदर' (मंकी पाक्स) के पहले केस की इत्तिला दी है। यूएई की सरकारी खबररसां एजेंसी ने बताया कि उनत्तीस साला मरीजा मगरिबी अफ्रÞीका के एक मुल्क से ताल्लुक रखती हैं और वो सय्याह है। यूएई में उनकी मतलूबा तिब्बी देख-भाल की जा रही है। गौरतलब है कि गुजिशता चंद रोज के दौरान अमरीका, बर्तानिया और फ्रÞांस समेत मुतअद्दिद योरपी और बर्रे आजम शुमाली अमरीका के ममालिक में आबला बंदर के केसों की की तसदीक की गई है। ये वाइरस किसी मुतास्सिरा शख़्स के जिस्मानी स्याल, लुआब दहन या कतरा तनफ़्फुस और छूने वाली सतहों के साथ राबते दोनों के जरीये इन्सान से इन्सान में फैल सकता है। इसके इनक्यूबेशन की मुद्दत दस से चौदह दिन के दरमयान है। इसकी अलामात में जिस्मानी दाने उभरने से पहले सूजन, पट्ठों में दर्द, सर दर्द और बुखार शामिल हैं।

कश्ती डूबने से दर्जनों रोहंग्या के डूबने का खदशा

यंगून : म्यामार के साहिल के पास रोहंग्या मुहाजिरीन की एक कश्ती डूब गई है। इत्तिला है कि कश्ती डूबने का ये वाकिया गुजिश्ता हफते पेश आया। कश्ती पर तकरीबन नव्वे अफराद सवार थे, जिनमें से दर्जनों की हलाकत का खदशा जाहिर किया जा रहा है। म्यांमार के आईआरवा दी खित्ते में अमरीकी हुक्काम ने बीस अफराद को बचा लिया, जिन्होंने बताया कि मजकूरा कश्ती 19 मई को रियासत राखीन से रवाना होने के कुछ दिनों बाद डूबी थी। अब तक चौदह अफराद की लाशें बरामद कर ली गई हैं जबकि पच्चास अब भी लापता हैं। म्यांमार में अब भी छ: लाख रोहंग्या हैं।


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