एक तंजीम ने सोशल मीडिया के जरिये दरगाह कैंपस में स्वास्तिक निशान होने का दावा किया
आरिफ कुरैशी, मुकेश परिहार
हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह में ढूंढने पर भी किसी भी हिस्से में ऐसी जाली नहीं मिली जिस पर स्वास्तिक का निशान बना हो। ना वैसे पत्थर मिले, जैसे पत्थर वहां होने का दावा महाराणा प्रताप सेना संगठन की जानिब से किया जा रहा है। दिलचस्प पहलू यह भी है कि राजस्थान सरकार ने कुछ समय पहले एक प्रोजेक्ट के जरिये दरगाह में निजाम गेट, अकबरी मस्जिद और क्वीन मैरी होज को हेरिटेज लुक में वापस लाया है। इन इमारतों में भी कहीं भी किसी पत्थर में ऐसी कोई अलामत या निशानी नहीं मिली। गौरतलब है कि महाराणा प्रताप सेना संगठन के दावे के बाद एक मुकामी अखबार की टीम ने जुमेरात की रात दरगाह कैंपस पहुंचकर कैंपस को बहुत बारीकी से देखा है।
दरगाह के निजाम गेट का रंग अब तक हरा और सफेद था, लेकिन राज्य सरकार के एक प्रोजेक्ट के तहत इसके हेरिटेज लुक को वापस लाने की कवायद कराई गई। दरगाह कमेटी के जरिये निजाम गेट पर बीते कई सालों से चढ़ा रंग उतरवाया गया जिससे मूल पत्थर उसमें नजर आने लगे हैं। अब निजाम गेट की जालियां भी साफ दिखाई देती हैं जो मार्बल की बनी हुई है।
भीतर जाने पर अखबार नवीस की टीम ने बुलंद दरवाजे के ऊंचे ऊंचे पत्थरों को भी देखा। इन पत्थरों पर कहीं भी किसी तरह की जाली नहीं है। ना कोई मजहबी अलामत इन पत्थरों पर नजर आती है। बुलंद दरवाजे से सटी बादशाह अकबर की बनवाई अकबरी मस्जिद है। यहां भी हेरिटेज वर्क कराया गया है। पहले इस मस्जिद की दीवारों पर सफेद और हरा रंग था जिसे माहिर कारीगरों ने महीनों मशक्कत कर उतार दिया है। रंग उतरने के बाद मस्जिद की दीवारों पर अब भूरा पत्थर और ईरानी शैली की नक्काशी साफ देखी जा सकती है। पूरी मस्जिद का बारीकी से जायजा लेने के बावजूद टीम को कहीं भी मशकूक जाली नजर नहीं आई।
दरगाह में गुंबद शरीफ यानी आस्ताना शरीफ के चारो ओर मार्बल की खूबसूरत जालियां लगी है। ये जाली भी कहीं से भी उन पत्थरों की नहीं है, जो महाराणा प्रताप सेना अपने व्हाट्सएप मैसेज में शक के तौर पर सोशल मीडिया में वायरल कर रही है।
दरगाह कमेटी के सदर अमीन पठान ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह शरीफ में महाराणा प्रताप सेना के राजवर्धन सिंह परमार की जानिब से जारी बयान में दरगाह शरीफ में सनातन हिंदू मंदिर होने और दीवारों व खिड़कियों में स्वास्तिक निशान होने का दावा किया गया है। इस तरह की कोई कलाकृति या अलामती निशान दरगाह में कहीं पर भी मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि दरगाह शरीफ गंगा जमनी तहजीब का मर्कज और मुल्क के सभी मजहब और फिरके के लिए काफी अदब की जगह है। उन्होंने फिजूल बातों से दरगाह शरीफ को बदनाम करने को बड़ी साजिश करार देते हुए इसकी मजम्मत की है। ऐसे लोगों का मकसद महज झूठ और भ्रम फैलाकर झूठी वाहवाही लूटना है। उन्होंने सरकार से मीडिया में इस तरह की झूठी और भ्रामक खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का मुतालबा किया है।
सीएम को खत लिखकर सख्त कार्रवाई का मुतालबा
आल इंडिया कौमी एकता कमेटी ने सीएम अशोक गहलोत को कलेक्टर के जरिये मेमोरेंडम भेजकर मजहबी मुकामात को लेकर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। कमेटी के रियासती सदर डॉक्टर एएस खान भारती और जिला सदर बदरुद्दीन कुरैशी ने सीएम को भेजे गए पत्र में लिखा है कि लोग मजब के नाम पर, मजहबी मुकामात को लेकर अपना नाम मीडिया में आने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। उनके इस फेअल से मुल्क में बदअमनी का माहौल बन रहा है। जैसा कि कमेटी को मालूम हुआ है कि सूफी बुजुर्ग हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह के लिए भी अफवाह फैलाई जा रही है। राजस्थान में गंगा जमुनी तहजीब व भाईचारे को खराब करने का माहौल बनाया जा रहा है। ऐसे लोगों के खिलाफ फौरी तौर पर कानूनी कार्रवाई की जाए। खत के जरिये उन्होंने इस तरह की भ्रामक खबरों पर फौरन रोक लगाने और ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की ग़जारिश की है।
अंजुमन सैय्यद जादगान ने भी की मुजम्मत
ख्वाजा साहब की दरगाह को लेकर एक तंजीम की जानिब से उठाए गए सवालों पर दरगाह के खादिमों की खुसूसी तंजीम अंजुमन सैयद जादगान के सदर हाजी सैयद मोइन हुसैन चिश्ती ने इसे बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इस तरह की हरकतों से करोड़ों लोगों के अकीदत को ठेस पहुंची है।
अंजुमन सदर ने कहा कि साढ़े आठ सौ साल से गरीब नवाज का दरबार है। यहां हर दौर में हर जमाने के हुक्मरानों ने मत्था टेका है। इस दरबार से यानी गरीब नवाज की जिंदगी से ही खुद्दाम जुड़े हुए हैं और खिदमत अंजाम दे रहे हैं। हमारे बुजुर्गों की जिंदगी से लेकर अब तक खिदतम का यह दौर जारी है। कभी ऐसी कोई बात सामने नहीं आई। उन्होंने यहां तक कहा कि दरगाह का स्ट्रक्चर उनके बुजुर्गों की हड्डियों पर बना हुआ है। ख्वाजा साहब के दरबार में आने वालों में 70 फीसद से ज्यादा लोग गैर मुस्लिम होते हैं।
सख्त पाबंदी लगनी चाहिए
देशभर में कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं जो अमन का माहौल खराब करना चाहते हैं। उन्हीं लोगों ने ख्वाजा साहब के दरबार को लेकर भी काबिले एतराज टिप्पणी की है। जिसकी सख्त मुजम्मत की जा रही है। सरकार से भी गुजारिश है कि ऐसे लोगों पर सख्त पाबंदी लगाई जाए। जो भी बात की जा रही है कि वह बेबुनियाद है।
- सैयद वाहिद हुसैन अंगारा शाह, सचिव, अंजुमन सैयदजादगान
