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‘अपने शौहर को कैसे कतल करें' किताब की लेखिका के खिलाफ मुकदमा दर्ज


लंदन :
अमरीका में 'अपने शौहर को कैसे कत्ल करें’ के अनवान से मजमून लिखने वाली मुसन्निफा खुद अपने शौहर के कत्ल के इल्जाम में मुकद्दमे का सामना कर रही हैं। फ्रÞांसीसी खबररसां इदारे एएफपी के मुताबिक ये एक ऐसा केस है, जिसमें जासूसी नावेलों की तमाम खसुसीआत मौजूद हैं, यानी इंश्योरेंस की बड़ी रकम, एक बेगुनाह शख़्स जिसको भूलने की बीमारी है, एक गुमशुदा हथियार और निगरानी की फूटेज, जिससे लगता है कि मुजरिम रंगे हाथों पकड़ा गया है। 

मुसन्निफा नेन्सी क्रेम्पटन ब्रूफी ने अदालत में बताया कि ये उनकी नई किताब का तआरुफ नहीं है, बल्कि ये हकीकी जिंदगी है। ब्रूफी के नावेलों की सीरीज 'राँग नेवर फेल्ट सो राइट', 'दा राँग हसबैंड और 'दा राँग लिवर’ को डेंल बरूफी को गोली मारने का सबब करार दिया जा रहा है। प्रासीक्यूटर ने अदालत को बताया कि 71 साला मुसन्निफा ने भारी अदायगी करनी थीं जबकि उनके शौहर काफी लाइफ इंशोरंसज रखते थे और उनके इंतिकाल की सूरत में उन्हें 14 लाख डालर मिलने थे। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक मुसन्निफा ने अदालत को बताया कि मुर्दा डेनीयल के मुकाबले में जिंदा डेनीयल के होते हुए वो मुआमले को बेहतर अंदाज में हैंडल कर सकती थी। उनका मजीद कहना था कि मैं आपसे पूछती हूँ, कहाँ है, इसमें तरगीब, जिस पर ऐडीटर मुस्कुरा कर कहेगा, तुमको अपनी स्टोरी पर मजीद काम करने की जरूरत है। प्रासीक्यूटर शान ओवर स्ट्रीट का कहना था कि सिक्योरिटी कैमरे में ब्रूफी की फूटेज मौजूद है, जब वो औरेगोन इंस्टीटियूट के बाहर मौजूद थीं, जहां उनके शौहर को क्लासरूम में कत्ल किया गया। उन्होंने ब्रूफी को मुखातब करते हुए कहा कि आप वहीं मौजूद थीं, जहां आपके शौहर को कत्ल किया गया, इसी किस्म की पिस्तौल से जो आपने खरीदी थी और जो अब गुमशुदा है। ब्रूफी ने अदालत को बताया कि उन्हें याद नहीं कि इस वक़्त वो वहां क्यों मौजूद थीं, ताहम अगर वो सीसीटीवी फूटेज में नजर आ रही हैं तो इसकी वजह ये है कि अपनी स्टोरी के मवाद के लिए वा उस इलाके में घूम थीं। 63 साला डेनीयल एक क्लासरूम में उस वक़्त मुर्दा हालत में मिले थे, जब तलबा वहां पहुंचे, उनको दो गोलीयां मारी गई थीं। तहकीकात से ये बात सामने आई है कि कत्ल में इस्तिमाल होने वाली गन अब तक बरामद नहीं हुई। ब्रूफी ने तस्लीम किया कि उन्होंने एक पिस्तौल खरीदा, जो उनके शौहर की हिफाजत के लिए था, जब वो मशरूम्ज की कटाई के लिए बाहर जाते थे। उन्होंने अदालत को बताया कि इसमें बहुत तजाद (अंतरविरोध) है कि क्या लिखने के लिए था और क्या तहफ़्फुज के लिए। 

प्रासीक्यूटर का कहना था कि मुसन्निफा (लेखिका) का मजमून 'हाव टू मर्डर हसबैंड' अब भी आॅनलाइन मौजूद है और उनकी किताबें अमेजोन पर देखी जा सकती हैं, उनको शौहर के कत्ल से कब्ल माली मुश्किलात का सामना था। शौहर को कत्ल किए जाने के हवाले से मजमून में नापसंदीदा शरीक-ए-हयात से जान छुड़ाने पर बेहस की गई है। अप्रैल में शुरू होने वाले अदालती ट्रायल की समाअत जारी है।


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