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अल्लाह और उसके रसूल के फैसले पर सर तस्लीमे खम करना ही मुस्लमान होने की पहचान : अमीर शरीयत

मुदर्रिसा फुरकानिया अरबिया मध्यपूरा में दारुलकजाका कयाम
मौलाना वहीद अल्लाह कासिमी काजी मुकर्रर 
33 हुफ़्फाज किराम की दस्तार बंदी

मध्य पूरा : दार अलकजा का वजूद इस सरजमीन पर अल्लाह की रहमत और इस्लामी निजाम-ए-अदल की बेन अलामत है, एक मुस्लमान होने की हैसियत से हम सबका फरीजा है कि अगर हमारे दरमयान कोई नजाअ हो जाये तो उसको अल्लाह और रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के अहकाम के जरीया हल कराएं। दारुलकजा ऐसी जगह है, जहां किताब अल्लाह और रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के मुताबिक मुआमलात का हल किया जाता है। ये बातें अमीर शरीयत बिहार, उड़ीसा व झारखंड हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने 14 मई को मुदर्रिसा फुरकानिया अरबिया, मुहम्मद पूर, मधेली बाजार आलिम नगर मध्य पूरा में दार अलकजा-ए-के कियाम के मौका पर मुनाकिद इजलास से खिताब करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि जब हम ला इलाहा इल्लल्लाह... कहते हैं तो हमारे और अल्लाह के दरमयान एक मुआहिदा हो जाता है कि या अल्लाह आप ही इताअत और इबादत के लायक हैं और इबादत का मफहूम है कि हमारी पूरी जिंदगी अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की इताअत ओ फर्मांबरदारी और उसके सामने जबीन इताअत को खम करने में गुजरे। उन्होंने कहा कि एक मुस्लमान की पहचान ये है कि वो अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के हर फैसला पर सर तस्लीम खम कर दे। 

इस मौका पर मुदर्रिसा हाजा के 33 हुफ़्फाज किराम की दस्तार बन्दी भी हजरत अमीर शरीयत और दीगर उल्मा किराम के हाथों अमल में आई। साथ ही मर्कजी दारुल कजा इमारत शरयह से तर्बीयत याफताह आलमे दीन मौलाना वहीद अल्लाह कासिमी को काजी शरीयत मुकर्रर किया गया। अखीर में हजरत अमीर शरीयत की दुआ पर इजलास का इखतताम हुआ।


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