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इंडियन रेलवे ने कोरोना अय्याम में कमाए 15 सौ करोड़

मुअम्मर शहरियों को टिकटों पर रियायत न देने हुआ आमदनी में इजाफा 


नई दिल्ली :
हिन्दुस्तानी महिकमा रेलवे ने कोरोना अय्याम में मुअम्मर (बुजुर्ग) शहरियों के लिए मुखतस टिकटों पर रियायत ना देकर पंद्रह सौ करोड़ कमा लिए। ये मालूमात एक आरटीआई दरखास्त में सामने आई हैं। मध्य प्रदेश के चन्द्र शेखर गौड़ की जानिब से एक दरखास्त दी गई है, जिसमें लिखा गया है कि रेलवे का कहना है मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 तक 7.31 करोड़ मुअम्मर शहरियों को कोई छूट नहीं दी गई है। रेलवे की तरफ से उनमें 4.46 करोड़ मर्द 2.84 करोड़ खवातीन और 8,310 खवाजासरा शामिल हैं। आरटीआई के मुताबिक इस दौरान रेलवे ने मुअम्मर शहरीयों के टिकटों में कोई रियायत ना देकर 3,464 करोड़ रुपय कमाए हैं  जिनमें से 1,500 करोड़ रुपय रियायत की मुअत्तली की वजह से शामिल हैं। गौरतलब है कि कोरोना वबा के आगाज के बाद से नाफिज लॉक डाउन के बाद रेलवे को बहुत ज्यादा नुक़्सान हुआ है। ऐसे में लॉक डाउन खुलने के बाद रेलवे ने पहले की कई सहूलयात बंद कर दीं। ऐसी ही एक सहूलत मुअम्मर शहरियों के लिए दस्तयाब रेलवे रिजर्वेशन में किरायों की कीमत में कंसेशन है। गुजिश्ता चंद दिनों में रेलवे में कोरोना की वजह से कई पाबंदियां हटा दी गई हैं। ट्रेन में कम्बल चादर वगैरा की सहूलत दुबारा शुरू कर दी गई है। ऐसे में गुजिश्ता दिनों रेलवे रिजर्वेशन में बुजुर्ग शहरियों को दी गई छूट पर कई सवाल उठ रहे थे कि क्या हुकूमत इस स्कीम को बहाल करेगी, हुकूमत ने कोरोना के दौरान दो साल तक पार्लियामेंट में मुअम्मर शहरियों के सफर के आदाद-ओ-शुमार पर तहरीरी जवाब देते हुए कहा कि गुजिश्ता दो सालों में ट्रेन में बुजुर्ग शहरियों के सफर की तादाद में इजाफा हुआ है। वजीर रेलवे ने तहरीरी जवाब में बताया है कि 20 मार्च 2020 से 31 मार्च 2021 के दरमियान तकरीबन 1.87 करोड़ बुजुर्ग शहरियों ने ट्रेन में सफर किया, जबकि यक्म अप्रैल 2021 से 28 फरवरी 2022 तक 4.74 करोड़ बुजुर्ग शहरियों ने रेलवे का फायदा उठाया है।


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