नायब सदर जम्हूरीया ने हिन्दुस्तानी सकाफ़त पर तवज्जा मर्कूज करने के साथ इकदार पर मबनी तालीम पर जोर दिया
नई दिल्ली : नायब सदर जमहूरीया एम वैंकया नायडू ने हिन्दुस्तानी सकाफत और विरसे पर जोर देते हुए बच्चों को किरदार पर मबनी तालीम देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तालीम का मतलब तफवीज इख़्तयारात, रोशन ख़्याली और रोजगार के लिए है, न कि महज डिग्रियों और अस्नाद के हुसूल के लिए। तालीम के कमर्शियालाइजेशन पर अफसोस का इजहार करते हुए उन्होंने कहा कि पुराने जमाने में तालीम और तिब्ब को मिशन समझा जाता था। तालीम को समाजी तौर पर ऐसे ब शऊर और जिÞम्मेदार शहरी पैदा करना चाहिए जो मुआशरे और मुल्क की वसीअ-तर भलाई के लिए बे लोस जद्द-ओ-जहद करें। उन्होंने मजीद कहा कि अगर आप खुद से प्यार करते हैं तो आपको कोई याद नहीं रखेगा, लेकिन अगर आप दूसरों के लिए जिएंगे तो आप दूसरों की यादों में तवील अर्से तक जिंदा रहेंगे।
वैंकया नायडू गुंटूर के श्रीपती सीता रमिया हाई स्कूल की डाइमंड जुबली तकरीबात में हिस्सा ले रहे थे। तलबा, असातिजा और वालदैन से खिताब करते हुए उन्होंने जामा तालीम की एहमीयत पर-जोर दिया। उन्होंने मादरी जबान में तालीम की फराहमी को तर्जीह देने की जरूरत का इआदा किया। उन्होंने कहा कि दूसरी जबानें सीखते हुए अपनी मादरी जबान में महारत हासिल करना जरूरी है। समाज में गिरती हुई इकदार पर अपनी तशवीश का इजहार करते हुए उन्होंने अपील की कि वो अवामी नुमाइंदों को मुंतखब करें और उनकी हिमायत करें जिनमें किरदार, सलाहीयत और तर्ज़-ए-अमल अच्छा और काबिलीयत हो। इसके बाद उन्होंने गुंटूर में अनामिया लाइब्रेरी का दौरा किया, जिसमें वसीअ मौजूआत पर 2 लाख किताबों का एक भरपूर जखीरा है, जिनमें कुछ नायाब किताबें भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हर गांव में एक लाइब्रेरी होनी चाहिए। उन्होंने बच्चों में कम उमरी से ही पढ़ने की आदत डालने पर-जोर दिया।
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