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हजरत ख्वाजा फखरूद्दीन चिश्ती का उर्स शानो शौकत से मनाया गया


महफिल ए समां के साथ हुआ छोटा कुल

मोहम्मद हासम अली : अजमेर

हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के बड़े साहबजादे हजरत ख्वाजा फखरुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्सपाक मनाया जा रहा है। गुजिश्ता दिनों ख्वाजा साहब की छठी शरीफ सुबह 8 बजे अजमेर दरगाह शरीफ में मनाई गई  जिसके बाद जायरीन सरवाड़ पहुंचे और महफिल समां में शामिल हुए। उसके बाद शाही कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किए और रंग पाड़ा गया। नौ रज्जब को बड़े कुल की रस्म के साथ ख्वाजा फखर रहमतुल्लाह अलैह के उर्स का इख्तेताम होगा। उर्स में शामिल होने अजमेर सहित दूर दराज से जायरीनों का जत्था सरवाड़ शरीफ पहुंचा। 10 दिन तक चलने वाली उर्सपार्क की रस्म की शुरुआत माहे रज्जब के चांद रात परचम कुशाई के साथ होती है। चांद की तीन तारीख को अंजुमन सैयदजादगान की जानिब से चादर भेजी जाती है जो पांच तारीख को सूफियाना कलाम के साथ ख्वाजा फखर रहमतुल्लाह अलैह की मजार पर पेश की जाती है। अगले दिन छठी शरीफ पर महफिल ए समां के साथ उर्स का छोटा कुल होता है। नौ शाबान को दरगाह को गुलाब जल व केवड़े से धोया जाता हे इसी के साथ ख्वाजा फखर के उर्स का समापन हो जाता है। जिसके साथ ही बडा कुल होगा। इस दौरान मुल्क में खुशहाली, अमन व चैन की दुआएं मांगी गई। 


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