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सदियों से बन रही है नवाब साहब की ओर से शाही चाय

 मोहम्मद हासम अली

कर्नाटका हज कमेटी के मेंबरान ने की जियारत

अजमेर शरीफ : हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह में कर्नाटका हज कमेटी के मेंबरान ने जियारत की। कोरोना प्रोटोकाल के मुताबिक मेंबरान ने दरगाह में फूल और चादर पेश कर अपनी अकीदत का मुजाहिरा किया। दरगाह के खादिम सैय्यद हदीस अहमद जमाली बालीवाले ने उन्हें जियारत कराई जिसके बाद सैय्यद नजमुल हसन चिश्ती ने दस्तार बंदकर उन्हें तबर्रुकात दिया। हज कमेटी के मेंबरान ने बताया कि इस साल कर्नाटका के लोगो को ज्यादा से ज्यादा हज पर भेजवाने की मुहिम चल रही है इसीलिए ख्वाजा साहब की दरगाह में दुआ करने वे अजमेर पहुंचे हैं। 

महफिले समा व छठी शरीफ के साथ हुआ छोटा कुल 

हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के 810 वें उर्स के मौके पर बारगाह ख्वाजा गरीब नवाज़ में हर तरफ रहमत बरस रही है। ख्वाजा साहब की मुबारक छठी के मौके पर मंगल को कुल की रस्म अदा की गई। मुल्क व दुनिया से बड़ी तादाद में अकीदतमंद अजमेर शरीफ पहुंचे हैं।  कुल की रस्म के दौरान हर तरह हक मोइन, या मोईन के नारे गूंज रहे थे। सभी मजहब के मानने वाले अशीके ख्वाजा कुल की रस्म में गुलाब जल से दरगाह की दीवारों पर कुल के छींटे डालते हुए नजर आ रहे थे। साथ ही उस पानी को बोतल में भरकर ले जा रहे थे। इस मौके पर खादिमों ने बारगाह ख्वाजा में चादर पेश कर मुल्क में अमन, चैन, भाईचारे और कोमी एकता की दुआ मांगी।    


सदियों से बन रही है नवाब साहब की ओर से शाही चाय

सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के उर्स के मौके पर हर साल महफिलखाने में दरगाह दीवान की सदारत में महफिले समा का एहतेमाम किया जाता है जिसमें देशभर के मशहूर कव्वाल और हजारों अकीदतमंद शरीक होते है। इस मौके पर सूफी नवाब साहब की ओर से केसर की शाही चाय तबर्रुक के तौर पर बनाई जाती है। यह रिवाज सदियों से चला आ रहा है। यह चाय तकरीबन 6 घंटें तक भाप से तैयार की जाती है जिसमें केसर और कई तरह के ड्राई फ्रूट डाले जाते हैं। माना जाता है इस चाय को पीने से बीमारियों से भी शिफा मिलती है।     


मेहरोली से छड़िया लेकर कलंदर पैदल पहुंचे दरगाह, दिखाए हैरतअंगेज करतब 

दिल्ली मेहरोली से छड़िया लेकर कलंदर पैदल दरगाह पहुंचे। ख्वाजा साहब के चिल्ले से दरगाह तक जुलूस की शक्ल में कलंदर हैरतअंगेज करतब दिखाते हुए छड़ियों को दरगाह में पेश किया। दरगाह पहुंचने पर कलंदरों इस्तकबालज किया गया। कलंदरो का जुलूस ऋषि घाटी गुदड़ी शाह बाबा के करीब से दोपहर 3 बजे रवाना हुआ जो गंज, दिल्ली गेट, धान मंडी, दरगाह बाजार होते हुए दरगाह शरीफ पहुंचा जहां दरगाह के निजाम गेट पर उनका इस्तकबाल किया गया। गौरतलब है कि देशभर से कलंदर मेहरोली मे जमा होते हंै जहां से वे ख्वाजा साहब की छड़िया लेकर पेदल अजमेर के लिए रवाना होते हैं।     


शहनाई की धुन पर ­ाूमे अकीदतमंद

दरगाह के खादिम और सर्वधर्म एकता समिति के अध्यक्ष सैयद खुश्तर चिश्ती की जानिब से देहली गेट के करीब खुश्तर मंजिल में उर्स की महफिल सजाई गई जहां जबलपुर से आई शहनाई टीम ने शहनाई की धुन पर ख्वाजा साहब की शान में कलाम पेश कर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान आशिके ख्वाजा नाचते गाते हुए नजर आए।


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