खानकाह आलीया समरकंद के शोबा हिफ़्ज का अनोखा कारनामा
दरभंगा: बरोज जुमेरात को हाफिज मुहम्मद आमिर उसमानी सलमा बिन मुहम्मद अकबर अली, मुकाम कमाल उद्दीन टोला डाकखाना, जिÞला दरभंगा (बिहार) के लिए एक दुआइया महफिल का इनइकाद हुआ जिसमें दार-उल-उलूम फिदाईआ खानकाह समरकंद के सदर शेखुल हदीस हजरत मौलाना अबदुर्रहमान साहिब किबला व हजरत मौलाना हाफिज नसीम साहिब किबला और खानकाह के जुमला असातिजा व तलबा शरीक हुए। दरअसल हाफिज मुहम्मद आमिर उसमानी ने अपने मामूं हजरत मौलाना हाफिज-ओ-कारी सदर-ए-आलम साहिब कादरी के जे़रे तर्बीयत महिज 3 साल में कुरआन शरीफ हिफ़्ज करके एक मिसाल पेश किया है अजीजी मौसूफ ने अस्र-ए-हाजिÞर के नाजुक हालात में एक नशिस्त सिर्फ 9 घंटे में हजरत मौलाना हाफिज-ओ-कारी अजमत अल्लाह साहिब को मुकम्मल कुरआन शरीफ सुनाकर जहां अपने खानदान और अका़रिब का सर बुलंद किया है वहीं अपने महबूब इदारा के वकार की भी सही तर्जुमानी की है। वाजेह रहे कि दार उल-उलूम फिदाईया खानकाह समरकंद हिन्दोस्तान और बैरूने हिंद इज्जत की निगाहों से देखा जाता है। इस मुबारक मौके पर अजीजी हाफिज आमिर उसमानी सलमा को असातिजा ने ढेर सारी दुआओं से नवाजते हुए तालिबान उलूम नबवीह को ये पैगाम दिया कि सई-ए-पैहम और जोहद-ए-मुसलसल से मुश्किल काम को भी आसान बनाया जा सकता है और ये काम अजीजी हाफिज मुहम्मद आमिर सलमा ने करके दिखा दिया। अल्लाह पाक अजीजी हाफिज मुहम्मद आमिर सलमा को इल्म नाफे और आमाल-ए-सालेहा की तौफीक फरमाए।
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