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मौलाना सैय्यद जलालुद्दीन उमरी के जनाजे में उमड़ा जन सैलाब

नई दिल्ली : मुमताज आलमे दीन और जमात-ए-इस्लामी हिंद के साबिक अमीर मौलाना सैय्यद जलाल उद्दीन उमरी का जुमा की शब पौने नौ बजे इंतिकाल हो गया। अगली सुबह शाहीन बाग कब्रिस्तान में उन्हें हजारों सोगवारों की मौजूदगी में सपुर्द-ए-खाक किया गया। वे 88 बरस के थे और लंबे अर्से से बीमार थे। 

उनके इंतिकाल की खबर ने पूरे हिन्दोस्तान का माहौल गमगीं बना दिया है। नमाजे जनाजा अबुुल फजल एनक्लेव में जमात-ए-इस्लामी हिंद के मर्कजी दफ़्तर की मस्जिद में अदा की गई। याद रहे कि गुजिश्ता बरस उन्हें कोरोना हो गया था, उस वक़्त से उन्हें कमजोरी थी, लेकिन वो मामूल की सरगर्मियां अंजाम देने लगे थे, एक हफ़्ता कब्ल तबियत बिगड़ने पर उन्हें अल शिफा हॉस्पीटल में दाखिल कराया गया था, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली। नमाज जनाजा में राजधानी की मुमताज दीनी-ओ-मिली, सियासी और समाजी शख्सियात ने शिरकत की। 

नमाजे जनाजा की अदायगी और खिराज-ए-अकीदत पेश करने वालों में जमात के काइदीन ओहदेदारों और कारकुनों के अलावा जमात-ए-उलमाए हिंद के जनरल सेक्रेटरी मौलाना हकीम उद्दीन कासिमी, जमईयत के मीडीया सेक्रेटरी नियाज फारूकी एडवोकेट, मर्कजी जमई अहले हदीस हिंद के सदर मौलाना असगर अली, इमाम मह्दी सलफी, सदर मुशावरत नवेद हामिद, प्रोफेसर अखतरुल वासी, डब्लयूपीआई के सदर कासिम रसूल इलयास, मुस्लिम पोलेटिकल काउंसिल आफ इंडिया के सदर तस्लीम रहमानी, मुस्लिम मजलिस के सदर प्रोफेसर बशीर अहमद खां, जमई उलमा हिंद दिल्ली प्रदेश के सदर मौलाना मुहम्मद मुस्लिम, जनरल सेक्रेटरी मुफ़्ती राजिÞक, कारी मुहम्मद साजिद, मजलिस उल-उलमा के सदर मुफ़्ती सुहेल कासिमी के साथ साबिक मेंबर पार्लियामेंट मुहम्मद अफजल, मुमताज इस्लामी स्कालर, मुमताज सहाफी मासूम मुरादाबादी और मुतअद्दिद दीगर अहम शख्सियात मौजूद थीं। 

मौलाना उमर का शुमार आलम-ए-इस्लाम के उन चंद मुमताज उलमा में होता था, जिन्होंने मुख़्तलिफ पहलुओं से इस्लाम की नुमायां खिदमात अंजाम दी हैं और इस्लाम की तफहीम-ओ-तशरीह के लिए काबिल-ए-कदर लिटरेचर तैयार किया है। मौलाना उमरी हिन्दुस्तानी मुस्लमानों की सबसे बड़ी तंजीम आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के नायब सदर, मुस्लिम मजलिस मुशावरत के बानी रुक्न और मुख़्तलिफ कौमी और बैन-उल-अकवामी इदारों में आला ओहदों पर फाइज रहे। मौलाना ने कई बैन-उल-अकवामी कान्फ्रÞैंसों में शिरकत की। वो इदारा अल तहकीक-ओ-तसनीफ इस्लामी के चेयरमैन और इस्लामी तहकीकी जरीदे तहकीक इस्लामी के एडीटर थे। मौलाना की मुतअद्दिद तसानीफ के तराजुम अरबी, अंग्रेजी, तुर्की, हिन्दी, मलयालम, कन्नड़, तेलुगू, मराठी, गुजराती, बंगला और तमिल वगैरा में शाइआ हो चुके हैं। अमीर जमात-ए-इस्लामी हिंद इंजीनर सय्यद सआदत अल्लाह हुसैनी समेत मुल्क की सरकरदा शख्सियात ने मौलाना की वफात पर गहरे रंज-ओ-गम का इजहार किया है। 


मौलाना जलाल उद्दीन की रहलत मिल्लत-ए-इस्लामीया के लिए खसारा अजीम

आॅल इंडिया मजलिस इत्तिहादुल मुस्लिमीन दिल्ली रियासत के सदर कलीमुल  हफीज ने जमात-ए-इस्लामी हिंद के साबिक अमीर और मशहूर आलमे दीन मौलाना सय्यद जलाल उद्दीन उमरी की रहलत पर शदीद गम-ओ-रंज का इजहार करते हुए कहा कि मौलाना की वफात उम्मते इस्लामीया हिंद के लिए बड़ा खसारा है और हम जमाअत इस्लामी हिंद और मौलाना मरहूम के अहिल-ए-खाना और मुहिब्बीन के साथ इजहार ताजियत करते हैं। उन्होंने कहा कि मौलाना ने ना सिर्फ जमात-ए-इस्लामी हिंद को अपनी खिदमात के जरीया ऊँचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि उनका बड़ा कारनामा ये है कि उन्होंने मुल्क में बढ़ती नफरत के माहौल के दरमयान खास तौर पर ऐसे प्रोग्राम मुरत्तिब किए जिनके जरीया मुल्क में हम-आहंगी और भाईचारा को फरोग मिला। मौलाना मरहूम खानदानी उमूर, बच्चे की तर्बीयत, शादी, खाना-दारी और समाज में ताल्लुकात को लेकर इस्लामी तालीमात के माहिर थे और जुमा-ओ-ईदैन के खुतबात और तहरीरों में खास तौर पर रहनुमाई फरमाते थे। आप 50 से ज्यादा किताबों के मुसन्निफ थे। मौलाना की पूरी जिंदगी इस्लामी मिशन और तहरीक इस्लामी की आबयारी में गुजरी। 


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