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बिल्किस और इंद्रजीत को इंसाफ दिलाने रैली निकाल ज्ञापन सौंपा


नई तहरीक : भिलाई

अल मदद एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी ने बिल्किस और इंद्रजीत को न्याय दिलाने की मांग को लेकर मंगलवार को रैली निकालकर कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। 

ज्ञापन के माध्यम से सोसाईटी ने गुजरात के बिल्किस बानो मामले में दोषियों की रिहाई किए जाने पर आपत्ति जताते हुए फैसला वापस लेने की मांग की। साथ ही जालौर राजस्थान में 9 वर्षीय मासूम इंद्रजीत मेघवाल की छुआछूत के मारपीट के चलते हुई मौत पर रोष जताते हुए दोषी शिक्षक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की।

इस मौके पर सोसाइटी की अध्यक्ष अंजुम अली, सचिव कौसर खान, शाहिन खान, फरीदा बेगम, आयशा आलम, एसएन शेख, मुमताज बेगम, रुखसाना सिद्दीकी, रेहाना खान, समता सैनिक दल के प्रदेश अध्यक्ष आनंद रामटेके, बौद्ध समाज कोसा नगर के पूर्व अध्यक्ष सिद्धार्थ बोरकर, द बुद्धिस्ट सोसाइटी आॅफ इंडिया शाखा भिलाई के पूर्व अध्यक्ष सुदेश रामटेके, महिला सशक्तिकरण की अध्यक्ष जयश्री बौद्ध, समता सुरक्षा सेना के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी, द बुद्धिस्ट सोसाइटी आॅफ इंडिया शाखा दुर्ग के अध्यक्ष सीके डोंगरे, समता सैनिक दल दुर्ग शहर प्रमुख संतोष नंदा, संकल्पी द बुद्धिस्ट प्रचारक महिला की दुर्ग इकाई से सविता बौद्ध, रमा बाई महिला समिति, समता सैनिक दल, महाबोधि मुक्ति आंदोलन व महिला सशक्तिकरण सहित अन्य सामाजिक संस्थाओं व मसीही समाज की संस्थाओं की भी भागीदारी रही। 

क्या बिल्कीस बानो के गुनहगारों की तकरीम हिंदू कल्चर है : शिवसेना

मुंबई : आईएनएस, इंडिया 

शिवसेना ने इतवार के रोज बिल्कीस बानो केस के 11 मुजरिमों की रिहाई पर वजीर-ए-आजम नरेंद्र मोदी और मर्कजी वजीर-ए-दाखिला अमित शाह की खामोशी पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या हिंदू कल्चर में इस्मतदरी करने वालों की मेहमान-नवाजी की जानी चाहीए। ये तबसरा शिवसेना के तर्जुमान ‘सामना’ में शाइआ होने वाले कालम में किया गया है। ख़्याल रहे कि बिल्कीस बानो को 2002 के फसादाद के दौरान गुजरात, गोधरा में एक ट्रेन को नजर-ए-आतिश करने के बाद भड़के मुस्लिमकश फसादाद में इजतिमाई ज्यादती का निशाना बनाया गया था। इसके अलावा मुतास्सिरा की तीन साला बच्ची समेत खानदान के सात अफराद को कत्ल कर दिया गया था। 

बिल्कीस बानो इजतिमाई ज्यादती के वक़्त पाँच माह की हामिला भी थीं। इस केस में 11 मुजरिमों को 15 अगस्त को गोधरा सब जेल से रिहा किया गया, रियास्ती हुकूमत ने गुजरात हुकूमत की एमन्सिटी पालिसी के तहत उनकी रिहाई की इजाजत दी थी। ये तमाम मुजरिमीन 15 साल से जाइद अर्से तक जेल में रहे। ख़्याल रहे कि मुकामी रहनुमाओं ने मुजरिमों की रिहाई के बाद उन्हें मुबारकबाद पेश करते हुए फूल माला भी पहनाया और मिठाई भी खिलाई। ‘सामना’ में कहा गया है कि हैरत की बात है कि मुजरिमों को उस वक़्त रिहा किया गया, जब वजीर-ए-आजम मोदी अपने यौम-ए-आजादी के खिताब में खवातीन को बाइखतियार बनाने की बात तारीखी लाल किला की फसील से की थी। मजमून में सवाल पूछा गया है कि वजीर-ए-आजम मोदी और मर्कजी वजीर-ए-दाखिला अमित शाह इस मुआमले पर खामोश क्यों हैं, शिवसेना ने सवाल किया कि क्या इस्मतदरी करने वालों के साथ हुस्न-ए-सुलूक करना हिंदू कल्चर है; आर्टीकल में कहा गया है कि बिल्कीस बानो के मुस्लमान होने की वजह से मुजरिमों का जुर्म माफ नहीं किया जा सकता। शिवसेना ने कहा कि ये हिंदू-मुस्लिम मसला नहीं है बल्कि हिंदूत्वा की रूह और हमारी अजीम सकाफ़्त के वकार का मुआमला है।

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