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परेशान हाल शर्मा जी की मदद के लिए लतीफ खान ने बेच दी अपनी जमीन

चुरू : आईएनएस, इंडिया 

चूरू पूरे मुल्क में फिकार्वाराना हम-आहंगी (सांप्रदायिक सौहार्द्र) के लिए मशहूर है। यहां इन्सानियत का मजहब सबसे मुकद्दम समझा जाता है। हाल के एक वाकिये ने चुरू की इस खुसूसियत पर एक और मुहर जब्त कर दी है। 

चूरू के संवर मल शर्मा के तीन जहनी माजूर बच्चे हैं। बच्चों के ईलाज के लिए शर्मा जी को अपनी तमाम जमीन बेचनी पड़ी। इस मुश्किल वक़्त में उनके पड़ोसी फरिश्ते की तरह उनकी मदद के लिए आए और उसके साथ खड़े रहे। अपनी तमाम जमीन बेच देने के बावजूद उनके बच्चों की हालत जूं की तूं रही। शर्मा जी के तीन बच्चे हैंं, एक बेटा और दो बेटियां। तीनों जहनी तौर पर माजूर हैं। बच्चों के इलाज के लिए उन्होंने अपनी तमाम आबाई जमीन, यहां तक कि अपना घर तक बेच डाला। लेकिन इसके बाद भी बच्चों का मुकम्मल इलाज नहीं हो सका। शर्मा और उनकी बीवी बच्चों के ईलाज के लिए परेशान थे। 

वार्ड नंबर 42 में रहने वाले मुस्लमान खानदान को उनकी हालत का इल्म हुआ तो वो सब मिलकर उनकी मदद के लिए आए। और दुनिया के सामने एक मिसाल कायम की। उन्होंने शर्मा जी को न सिर्फ 300 मुरब्बा गज जमीन की पेशकश की बल्कि 80,000 रुपय भी जमा कर के उन्हें दे दिए। उन्होंने इस जमीन पर खानदान के रहने के लिए एक कमरा भी बनवाया और अब उनकी कोशिश है कि उनके लिए उस घर में तमाम बुनियादी सहूलयात मयस्सर हों। मदद करने वालों में एक इसहाक खान भी हैं। उसी मोहल्ले के रहने वाले इसहाक खान पहले शख़्स थे जो उनकी मदद के लिए आगे आए। इसहाक के बेटे लतीफ ने उन्हें अपनी दो बीघा जमीन से 300 मुरब्बा गज जो कि आबाई सूफी साहिब की दरगाह के करीब थी, मुफ़्त दी और उस जमीन का टुकड़ा खानदान के नाम दर्ज करवा दिया। लतीफ ने अपने दोस्त इस्लाम और इलाके के दीगर मकीनों (स्थानीय निवासियों) की मदद से 80,000 रुपय इकट्ठे किए और खानदान के लिए जमीन पर एक कमरा बनवाया। कमरे की तामीर का काम अभी चल रहा है। फर्श पर प्लास्टर नहीं हुआ है और दरवाजे भी लगाए जाने हैं। जब तक कमरा तैयार ना हो, इस्लाम ने खानदान के लिए किराए पर एक कमरा ले लिया ताकि वो वक़्ती तौर पर वहां रह सकें। 


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