जय आनंद मधुकर रतन भवन में सावसरिक महापर्व हर्ष और उल्लास के वातावरण में मनाने समाज के लोग लालायित हैं। शहर में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने पर्व की तैयारी कर ली है। जप, तप, धर्म, ध्यान, त्याग और तपस्या की अराधना के साथ 24 घंटे नवकार महामंत्र का जाप, अनुष्ठान आनंदपूर्वक जारी है। श्रमण संध परिवार के सभी वर्ग के लोग बड़ी संख्या में भाग लेकर प्रशन पर्व को आध्यात्मिक वातावरण देते हुए मना रहे हैं।
युवाचार्य भगवंत श्री महेंद्र ऋषि जी महाराज एवं छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनि जी महाराज साहब के सानिध्य में पयूर्षण पर्व संपन्नता की ओर अग्रसर है। इस क्रम में बुधवार से धार्मिक अराधना सॉवसरिक पर्व प्रारंभ हुआ। आनंद समवशरण की धर्म सभा को संबोधित करते हुए युवाचार्य भगवंत श्री महेंद्र ऋषि जी महाराज ने कहा कि दान देने से धन घट जाता है, यह हमारा व्यवहार ध्यान है, लेकिन व्यवहार के साथ उसके दूरगामी परिणाम यश, प्रतिष्ठा और धन को बढ़ाने वाले होते हैं। जितनी जरुरत थी, उससे कई गुना लाभकारी परिणाम सच्चे मन से दिए गए दान से मिलता है। दान के फलस्वरूप गुप्त रूप से वह चीज हमारे जीवन के लिए एक रक्षा कवच का कार्य करता है। उन्होंने कहा, दान देने से हमारा धन बढ़ता है, दान के लिए हमेशा अपने मन को तैयार रखना चाहिए। सहयोग के लिए दिया गया दान, हमेशा मल्टीप्लाई होता है। सहयोग का हाथ हमेशा तैयार रहना चाहिए। बाहर का परिग्रह हम जितना कम करेंगे, अंदर का परिग्रह भी कम होता जाएगा।
बुधवार को सुबह 8:30 बजे प्रवचन शुरु हुआ जो रात 12 बजे तक चलेगा। चातुर्मास में विराजे संत एवं साध्वी श्री मंगल प्रवचन देंगे। शाम को सूर्यास्त पश्चात सावसरिक प्रतिक्रमण संपन्न होगा। महिलाओं का प्रतिक्रमण आनंद समवशरण तथा पुरुष वर्ग का प्रतिक्रमण जय आनंद मधुकर रतन भवन में आयोजित किया गया है। रात में आनंद समवशरण में जयमल जी महाराज का अंतिम जाप अनुष्ठान होगा।
पयूर्षण पर्व के आठ दिनों में गुप्त आठ की तपस्या
पयूर्षण पर्व के आठ दिनों में बड़ी संख्या में लोगों की 8 की तपस्या संपन्नता की ओर अग्रसर है। 50 से अधिक लोगों ने 8 की तपस्या की है।
